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'फ़ज़ा भी है जवां जवां; गिटार कवर और टुटोरिअल

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पुरानी मगर सदाबहार मूवी 'निक़ाह' से ये गाना मैंने इस बार बजाया है। ये गाना बहुत अलग है क्योंकि इसकी हर एक पंक्ति में चार, फिर से कहूँगी - चार कॉर्ड्स हैं। और इसीलिए ये गाना मद्धम स्तर (Intermediate level) का है। इसे बजाने में बहुत मज़ा आया !
इस गाने के कॉर्ड्स इंटरनेट पर मिलना काफी मुश्किल है। जैसे तैसे मुझे इसका ओरिजिनल स्केल पता चला मगर बाकी काफी भ्रमित करने वाला था। तब मैंने कमान सम्हाली और अपनी अब तक की गिटार यात्रा में पहली बार किसी गाने का पूरा कॉर्ड प्रोग्रेशन सिर्फ 'सुनकर' तैयार किया। 
जब संगीत की बात हो तब 'सुनना' सबसे बड़ी कला मानी जाती है। मैंने बहुत हिम्मत और लगन से ये कॉर्ड प्रोग्रेशन तैयार किया है और सही लगता है। मगर अगर आपके पास कोई बेहतर सुझाव है तो ज़रूर बताइयेगा। 
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इसी लेख को अंग्रेजी में पढ़ें: 'Fazaa bhi hai jawan jawan' guitar cover + tutorial

मौर्या मंच २०१९ में युगल (duet) प्रदर्शन

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इससे पहले कि आप संगीतमय हो जाएँ, ज़रा गौर फरमायें तीन लेख पर जो मौर्या कला परिसर के २०१९ मैगज़ीन में प्रकाशित हुए हैं - मेरे बेटे का, मेरे बाबा का और मेरा। यहाँ पढ़ें
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जैसा कि आप जानते हैं कि मेरा परिवार कुवैत में मौर्या कला परिसर का सदस्य है। हर साल एम्.के.पी कई समारोह आयोजित करता है जैसे फ़ूड फेस्टिवल, संगीत संध्या, पिकनिक इत्यादि। मौर्या मंच, हालाँकि, इस संस्था का सबसे लोकप्रिय कार्यक्रम है। मौर्या मंच मूल रूप से एक सांस्कृतिक कार्यक्रम है जो इसके सदस्यों को अपनी प्रतिभाएं दिखाने का बेहतरीन मौका देता है।

मौर्या कला परिसर २०१९ सौवेनीर में हमारे लेख

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एक खूबसूरत खबर !

मौर्या कला परिसर की सालाना मैगज़ीन यानी सौवेनीर (२०१९) में मेरी तरफ से तीन लेख छपे: मेरे बेटे का, मेरे बाबा का और मेरा।

भारतीय दूतावास में विश्व हिंदी दिवस समारोह

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बहुत हाल ही में, इसी गुरूवार जनवरी ९ को, मुझे भारतीय दूतावास, कुवैत में उनके समारोह में सम्मिलित होने के लिए आमंत्रित किया गया था। मैंने यह समारोह मौर्या कला परिसर की तरफ से किया। एम्. के. पी. एक सशक्त संस्था है जिसके हम सदस्य हैं। मौका था विश्व हिंदी दिवस। 
आप तसवीरें और मेरा कविता पाठ यहाँ देख सकते हैं: 

मैंने गणतंत्र दिवस पर लिखी अपनी ही एक कविता का पाठ किया - भारत की अद्वितीय स्वर्णिम गाथा। 
मेरे लिए यह अवसर गर्व से भरा था। अपनी बात को भारतीय दूत, श्री जीवासागर जी और अन्य महत्त्वपूर्ण अतिथियों के समक्ष कहने का मौका बहुत स्वर्णिम था। 
Writers' Forum (जिसकी मैं सदस्य भी हूँ ) से मेरे दो दोस्त भी अपना कविता पाठ करने के लिए आमंत्रित थे। बहुत ही सुन्दर कविता थी। सभी को हमारी कविताएं पसंद आयीं। 
इसी लेख को अंग्रेजी में पढ़ें: Vishva Hindi Divas celebration at Indian Embassy, Kuwait 

'छू कर मेरे मन को; गिटार कवर और टुटोरिअल

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आखिरकार मैंने अपना मनपसंद गाना गिटार पर बजा ही लिया। रेडी तो बहुत दिनों से था मगर किन्ही दूसरी चीज़ों में व्यस्तता के कारण बना नहीं पायी। इसीलिए देर हो गयी। 

मेरे पीछे जो आप गिटार देख रहे हैं वो मेरा नया गिटार है। हमारे नए मेहमान का स्वागत कीजिये। मेरे गिटार सिर्फ बजाने की एक वस्तु नहीं हैं। वो मेरा ही अगला पड़ाव हैं और तो और आगे चलते रहने की प्रेरणा भी। 
उम्मीद है कि आपको पसंद आएगा। गाने के बाद टुटोरिअल भी है जिसमें आप सीख सकते हैं कि ये गाना कैसे बजाना है। 
आप मेरे फेसबुक म्यूजिशियन पेज को like कर सकते हैं : गिटार गॉर्जियस 
इसी पोस्ट को अंग्रेजी में पढ़ें: Chhu kar mere man ko Guitar cover+tutorial

खुद के नाम एक ख़त (2018)

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प्यारी तुम,
एक सलाह। जब भी खुद को एक ख़त लिखने बैठो तो इतना ज़रूर ध्यान रखो कि तुम्हारा कोई मनपसंद टीवी सीरियल ना आ रहा हो। जैसे फ्रेंड्स या द बिग बैंग थ्योरी। ऐसा  करना ठीक नहीं है। 
खैर, चलो आगे बढ़ते हैं। 
आज २०१८ का आखरी दिन है, दिसंबर ३१ और चूँकि तुमने पूरे साल यानी ३६४ दिन अपने लिए कोई खत नहीं लिखा है तो अब ऐसा करना शायद थोड़ा भावुकता से भरा या सिली सा लगे। मगर फिर किसी भी काम को पहली बार करने में एक बात है - ये ख़ास बन जाता है !तो इसीलिए इस खत को २०१८ के अंत में किये गए तमाम ख़ास चीज़ों में से एक समझो।


२०१८.  ऐसा साल जिसमें खुशियों से ज़्यादा ग़म, चढ़ाव से ज़्यादा उतार और आशा से ज़्यादा निराशा देखा। मगर क्या ये इसे कम ख़ास बनाते हैं?

छठा दिन - 'मस्तीभरी छुट्टी!' सीरीज

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'मस्तीभरी छुट्टी!' सीरीज में अगला है हमारा छठा दिन। पांचवें दिन के लिए यहाँ क्लिक करें। 
छठा दिन 
वीकेंड पालक झपकते ही बीत गया। हमने बहुत सारे काम किये। मैंने शुक्रवार को एक के बाद एक दो इवेंट्स में भाग लिया। शनिवार कुछ ज़रूरी शॉपिंग में निकल गया। एक अभिभावक होने के नाते मुझे ऐसा महसूस होता है कि बच्चों को शॉपिंग पर ज़रूर ले जाना चाहिए। ये एक अच्छा बहाना है उनमें धैर्य और अनुशासन लाने का। मगर हाँ! ज़रूरी शॉपिंग की बात हो रही है यहाँ पर। 
जब पतिदेव ऑफिस के लिए निकल गए तो मैं  अपने बेटे के साथ बिस्तर में घुस कर बातें करने लगी। हमने कुछ देर बातें की और उसी में किसी पड़ाव पर उसने एक बहुत अच्छा सवाल पूछा -