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December 21st 2012? क़यामत का दिन नहीं है :)

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2012 और The Day After Tomorrow कुछ ऐसी मूवीज हैं जिन्हें देख के क़यामत के दिन का काफी हद तक अनुमान लग जाता है। क़यामत का दिन वो दिन है जब हमारी पृथ्वी का सर्वनाश हो जायेगा और हम कुछ भी नहीं कर सकेंगे और वो दिन बहुत दूर नहीं है ...केवल एक दिन बाद है December 21st 2012. इस दिन को Doomsday day या The Judgement Day भी कहा जाता है। मूवी 2012 में ये दिखाया गया है की पृथ्वी जगह जगह से फट जाएगी, विशालकाय steroids धरती पर गिरने लगेंगे, सारी बिल्डिंग्स धुल में मिल जाएँगी, कई सारे भूकंप अपना कहर पृथ्वी पर अपना लावा बरसा कर निकालेंगे मगर मुख्य तत्व जो पृथ्वी के विनाश के लिए ज़िम्मेदार होगा वो है पानी। जिस तरह से इन सारी चीज़ों को दिखाया गया है वो आपके रोंगटे खड़े कर देने के लिए काफी हैं। ये आपको सच में कल्पना करने के लिए बाध्य कर देता है कि अगर आप ऐसे किसी विनाशकारी घटना के हिस्सा होते तो क्या होता। मुझे ये पता है क्योंकि मैंने जब भी ये मूवी देखी है अपने आप को किसी steroid या बिल्डिंग के गिरने की वजह से मरना या पानी में डूब के मरने जैसा सोचा है। कभी कभी तो मेरी आँखों में आंसू आ जाते हैं। सुनने म…

कुछ पहेलियाँ आपके लिए

कैसा हो अगर मैं आज आपको कुछ पहेलियाँ सुलझाने के लिए दूं? समय व्यतीत करने का अच्छा तरीका लगता है मुझे। ये पहेलियाँ आसान भी हैं। बस थोडा सा अपने दिमाग पर जोर डालने की ज़रुरत है। तो देखते हैं, कौन सबसे ज्यादा पहेलियाँ सुलझाता है।
पूरी पंद्रह पहेलियाँ हैं और वो भी English में। आसान है मगर बूझो तो जाने.... What would you call a frog's car if he has parked it in a NO PARKING zone?Why a skeleton had to climb up on the tree?How can you make a skeleton laugh?A lion was very hungry. He went to a self-service restaurant located deep inside the jungle. But when he reached there, he was highly disappointed. Why?An elephant and an ant were playing hide and seek. When the elephant closed his eyes, the ant hid himself in a temple but elephant found him very easily. How?My uncle was reading a book in his room while my aunt came and switched off the light. The strange thing happened was- my uncle continued reading even the room light was switched off. How is that possible?It always takes two sticks…

तुम्हारी याद में...

रात काफी हो चुकी है पर मेरे पति अभी आये नहीं हैं। उन्हें ऑफिस के ही कुछ ज़रूरी काम से रुकना पड़ा। घर का सारा काम ख़तम करने के बाद भी काफी समय बच गया। कुछ इधर उधर की चीज़ें पढ़ीं और थोडा टीवी भी देखा। मगर कुछ खाली खाली सा लग रहा था। मन भी नहीं लग रहा था तो बेमन से ही टीवी देखती रही थोड़ी देर मगर कितनी देर? मन धीरे धीरे सच बता ही देता है। खैर! कुछ ख़ास समझ नहीं आया तो सोचा एक कविता ही बनाने की कोशिश करती हूँ। अच्छा समय व्यतीत होगा और जो अगर अच्छी पंक्तियाँ बन गयीं तो क्या कहने। सुमित तो सुनके बेहद खुश होंगे। तो ताबड़ तोड़ जोर देने के बाद कुछ चंद लाईने दिमाग की नसों को निचोड़ कर बाहर आई जो कुछ इस तरह से हैं:



जो तुम साथ नहीं तो कहीं कुछ भी नहीं, ना ये ज़मीं का सहारा और ना आसमाँ का किनारा। वक़्त का दरिया तो बहता रहा, पर हम उस पल में रुके ठहरे सहमे से बैठे रहे। ना दिल है यहीं ना हम हैं यहीं, जो तुम साथ नहीं तो कहीं कुछ भी नहीं।
क्यों वक़्त पंख लगाकर उड़ चला, जब तुम यूँ पास आकर बैठ गए? क्यों दिल उन नज़रों की गहराईयों में डूब चला? जब तुम नज़र में नज़र मिलाकर कुछ यूँ हंस दिए? क्यों जीवन की हलचल इक पल मे…

क्या करेंगे अगर सभी दरवाज़े बंद हो?

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बहुत ही आम सा सवाल है न? ऐसे ही सवाल किसी व्यक्तित्व को निखारने या खुद को विकसित करने जैसे क्लासेज में बताये जाने वाला लगता है? मगर ये सवाल ऐसी किसी भी जगह से नहीं आया है। बल्कि ये मेरी  ज़िन्दगी के अनुभवों में से एक है जो आज मेरे ब्लॉग पर अंकित होने जा रहा है।

एक समय ऐसा आया था जब ज़िन्दगी ने मुझसे यही सवाल पूछा था और मैंने जवाब भी दिया था। जवाब थोडा मुश्किल था; बल्कि बहुत ही मुश्किल मगर मैं अपने शब्दों से पीछे नहीं हटी चाहे कैसी भी परिस्थितियां मुझे झेलनी पड़ें या ज़िन्दगी मुझे कितना ही कठोर समय दिखाए मगर मैं अपने जवाब पर से नहीं हटी। मैंने जो कहा पूरे दिल से कहा और कभी अपने शब्दों को बदला नहीं। क्या हो अगर मैं वही सवाल आपसे पूछूं? क्या हो अगर वो सारे दरवाज़े बंद हो जिससे आप बाहर जा सकते हैं?
मैं जानती हूँ की हम में से बहुतों का जवाब होगा: एक खिड़की ढूंढ लो तब। मगर क्या आप मेरे सवाल का जवाब पूरी इमानदारी और सच्चाई के साथ दे रहे हैं? ऐसे जवाब मैंने कई लोगों से सुना है, कभी कभार अपने फेसबुक वाल पे पढ़ा है और कितनी ही किताबों में भी इसे पढ़ा है। सभी एक जवाब बदले में देते हैं: एक खिड़क…

ख़ास अवसरों को मनाने के कुछ खास tips

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कितने मेहमान आयेंगे ये निश्चित हो गया है, खाने में क्या बनेगा ये भी तय हो गया है, घूमने की जगह भी तय हो गयी है, ब्यूटी पार्लर में अपॉइंटमेंट भी फिक्स हो गया है, नए कपडे भी खरीदे जा चुके हैं, कैसा हेयर स्टाइल होगा ये भी पहले से निश्चित हो चूका है और अब सिर्फ उस खास दिन का इंतज़ार है। क्या कहा आपने? जी नहीं। आप गलत सोच रहे हैं। मैं कोई पार्टी वगैरह की तैयारी में नहीं लगी हूँ वरन आपके छुट्टियों में की जाने वाली तैयारी की बात कर रही हूँ। क्रिसमस और न्यू ईयर जैसे दो ख़ास occasions आने के लिए तैयार हैं और आपको लगता है कि आपने सब कुछ कर लिया है। मगर रुकिए! क्या आपने celebrations मनाने के पहले अपने उपर ध्यान देने वाली बातों पर गौर किया है? ये उन खास समय में से एक है जिसे आप अलग अलग तरीके से मनाते हैं। नीचे दी गयी कुछ ख़ास tips पर ध्यान दें और अपने व्यक्तित्व में एक जादूई असर देखें।



अपने आप को hydrated रखें। इसका मतलब ये नहीं कि आप हर रोज़ 8-10 गिलास पानी पीते रहे। इसका मतलब ये होता है की आप पानी के साथ साथ ताज़े फलों के जूस, स्मूदीज़, हर्बल ड्रिंक्स, मोईतोज़, वसा रहित दूध इत्यादि जैसे स्वस्थ …

जोक्स जो आपको हंसाएं

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आज मैं इन्टरनेट पर कुछ बढ़िया जोक्स पढ़ रही थी और सोचा आप सब से शेयर करने को। इससे आपकी सारी चिंताएं और मुश्किलें कुछ समय के लिए दूर हो जाएँगी, ऐसी मुझे आशा है।


Son-in-law to father in law writes a letter:

Dear Dad,

I deeply regret taking a petrol car in dowry. Please take your daughter or car back. I can not afford both of them.

Yours loving,
Son-in-law


A lady was trying to take control of her hair which was getting drier day by day. She treated her 
scalp with olive oil and then had several rounds of shampooing in order to get rid off its smell.

The same night, she asked her husband before going to sleep.

"Do I smell like olive?"

"No. Why? Do I look like Popeye?"




गेम्स और मुस्कराहट से भरी एक रात

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कुछ रात पहले, मैं और मेरा बेटा रात के समय को कुछ गेम्स खेलते हुए बिता रहे थे। मेरे पति तो बहुत ही गहरी नींद में सो रहे थे जबकि हम दोनों की नींद इस समय उड़न छू थी। आमतौर पर मैं अपने बेटे को कुछ कहानियां या लोरियां सुनाकर सुलाती हूँ। गेम्स तो शायद कभी नहीं खेला सोने टाइम पर। मगर शायद वो रात ही कुछ अलग थी। अपना समय काटने के लिए मैंने और मेरे बेटे ने कुछ गेम्स खेलना शुरू किया। हमें बहुत ही मज़ा आया और हम खूब हँसे। ये बात और है की मेरे पति की तरफ से कुछ इस तरह की बातें हम तक आ रही थी जैसे "hmmm" और "भगवान के लिए तुम दोनों सो क्यों नहीं जाते" पर उनकी एक न चली और हम अपनी मस्ती में डूबे रहे। हम दोनों ही अपने बचपन के समय को जी रहे थे।


तो पहला गेम हमने खेला वो था "Stone-Paper-Scissor". ये प्रसिद्ध गेम्स में से एक है और इसे खेलने के लिए कुछ नहीं चाहिए सिवाय आपके हाथों के। इसे कितने लोग भी खेल सकते हैं और बहुत easy  गेम है ये। बिना किसी शक शुबहा के मेरे बेटे ने मुझे हरा दिया। वो समझदारी से खेल रहा था या यूं अगर यूँ कहूं की वो लकी रहा तो ज्यादा बेहतर होगा।
दूसरा गेम …

द ब्रेन स्टॉर्म थ्योरी

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एक अखबार मैं  मैंने एक बहुत ही रोचक आर्टिकल को पढ़ा जिसका शीर्षक था "द ब्रेन स्टॉर्म थ्योरी". इसे मौलाना वाहिदुद्दीन खान ने लिखा था। जो मैंने पढ़ा वो जानकारी रखने योग्य है और इसको यहाँ मैं इसलिए शेयर करना चाहती हूँ ताकि हम अपने दिमाग की एक और जटिल प्रक्रिया को समझ पाएं जो हमारे पूरे अस्तित्व पे बहुत ही गहरा असर डालती है।

ये आर्टिकल मौलाना के Kigali जगह पे घुमते हुए एक किस्से को बताता है। Kigali, Rwanda शहर की राजधानी है और ये सेंट्रल अफ्रीका में स्थित है। मौलाना वहां एक गुजरती भारतीय से मिले। वो एक कपडे की दूकान चलाता था और अपने ग्राहकों से अंग्रेजी भाषा में बहुत ही सरलता से बात करता था। मौलाना को ये देख कर काफी आश्चर्य हुआ। उसके धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलने की क्षमता ने मौलाना को चकित कर दिया।वो अपनी जिज्ञासा को शांत नहीं कर पाए तब उस दुकानदार की कहानी को उसके एक दोस्त ने सुनाया।
"कुछ साल पहले जब वो (गुजराती भारतीय) यहाँ आया था तो उसे अंग्रेजी ज़रा भी नहीं आती थी जबकि उसके ग्राहक बहुत अच्छे से अंग्रेजी में बातें करते थे। Kigali में बोलचाल की मुख्या भाषा अंग्रेजी है और अपने …

ज़िन्दगी के आखरी 60 मिनट में आप क्या करेंगे?

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एक बार मुझे एक बढ़िया सेमिनार attend करने का सुनेहरा मौका मिला। ये सेमिनार एक दिन का था और ये Personal Glorification and Communication Development पर आधारित था। इस सेमिनार में हमें इंसानों की अलग अलग चीज़ों के बारे में, हम कैसे और किस हद तक बिना शब्दों के एक दुसरे से बातें करते हैं और कुछ दिमाग को आराम देने की activities के बारे में बताया गया। आमतौर पर ये सब बातें साधारण सी लगती हैं मगर इस सेमिनार की खास बात ये थी कि यह एक विद्वान् कॉर्पोरेट ट्रेनर Mr. Naresh Chhitija का ट्रेनिंग सेशन था। उन्होंने सेशन की शुरुआत बहुत ही अच्छे से की और जैसे जैसे ट्रेनिंग आगे बढती गयी, हम सभी उनकी बातों से प्रभावित होते गए। कम से कम मैं तो प्रभावित थी। मैं उनकी बातों को बहुत ध्यान से सुन रही थी और उनके हर एक शब्द को अपने दिमाग में बैठाने की कोशिश कर रही थी। उनकी बातें बहुत ही प्रेरणादायी थी और हमें ज़िन्दगी और व्यवहार के कई मुद्दों पर सोचने को मजबूर कर रही थी। मैंने कुछ चीज़ें नोट भी की जो मुझे आगे काम दे सकती थी।

रोचक बातों से भरा एक शनिवार

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आम सुबह से शुरू हुआ ये शनिवार दोपहर तक ढलते ढलते एक ऐसे दिन  बदल गया जिसमें कुछ खास नयी बातें हुई। ये सब कुछ ऐसे हुआ:

जब तक मेरे पति अपना नाश्ता करने के बाद अपने नवोदय मीटिंग के लिए निकले, तब तक मैंने भी निश्चय कर लिया था आज बाहर कहीं जाकर अपने बेटे के साथ एन्जॉय करने का (यहाँ एन्जॉय करने को आप गलत शब्दों में ना ले। इसका सामान्य सा मतलब है किसी शौपिंग मॉल या पार्क में समय बिताने का). वैसे भी मैं एक सुस्त सी इंसान हूँ जो ज़्यादातर समय अपने घर में ही व्यतीत करती है। अपना काम ख़तम करने के बाद मैं अपने नाश्ते का प्लेट लेके खाने बैठी। अपने स्वादिष्ठ आलू परांठे का आनंद लेते हुए मैंने अपने फेसबुक और मेल्स को चेक करना शुरू किया। जहाँ फेसबुक अब कुछ खास नहीं रह गया है सिवाय कुछ बेकार स्टेटस और  updates के, वहीँ मेरे मेल बॉक्स में एक मेल आया था जिसमे Bangalore में होने वाली क्लासेज/वर्कशॉप के बारे में विस्तार से दिया था। यूँ तो मैं इस तरह के मेल्स नज़रंदाज़ कर देती हूँ मगर फिर भी आज मैंने देखा और एक ऐसे वर्कशॉप के बारे में पता चला जिसमे बच्चों के लिए एक घंटे का X-mas tree को सजाने की activitiy …

"उम्मीद का साथ न छोडें" -- मेरी एक रचना

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उपर दिया हुआ चित्र मुझे मेरे फेसबुक न्यूज़ फीड में मिला और इसने मेरा ध्यान आकर्षित किया। यह चित्र न सिर्फ ये बताता है कि हमें अपनी ज़िन्दगी में कभी भी उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए वरन ये भी बताता है की हम वक़्त के साथ बेहतर होते जाते हैं और ये हमें हर बुरी स्थिति से लड़ने के लिए मजबूत बनता है। इसी प्रेरणा से अपने विचार रुपी सामग्री को दिमाग रुपी मिल में चलाने से कुछ पंक्तियाँ उभर कर आयीं जो यहाँ नीचे एक कविता की तरह लिखी है। कितनी अद्भुत बात है की कल ही मैंने अपने blog  पोस्ट में कहा था की मैं कवितायेँ बनाने में अक्सर फेल हो जाती हूँ मगर देखिये आज ही मैंने कुछ एक बना ही लिया। सच ही कहा है...कोई नहीं जनता कल आपके लिए क्या लेकर आएगा (you never know what tomorrow will bring)। मुझे आज ख़ुशी है की मैं अब धीरे धीरे कवितायेँ बनाने में थोड़ी बहुत सफल हो रही हूँ। उम्मीद करती हूँ की आप को ये पसंद आएगी। 
विशेष: कविता मूलतः जिस भाषा में लिखी जाए, उसे उसी भाषा में पढने से इसका असल मतलब समझ  आता है। मैंने ये कविता english में बनायीं तो इसे यहाँ उसी भाषा में लिख रही हूँ।  किसी भी तरह की असुविधा के लिए ख…

एकांत में बैठी कभी यही सोचती हूँ

मेरी बनायी एक छोटी से रचना पेश है ::

सूरज की गर्माहट देने वाली किरणें कभी कभी
आँखों में चुभती क्यों हैं?
चिड़ियों की चेह्चाहाने की मीठी मधुर आवाज़,
कानों में पिघले शीशे की तरह गलती क्यों हैं?
जो ज़िन्दगी कभी हसीं खूबसूरत सफ़र सी चलती है,
वही ज़िन्दगी काँटों भरी राह सी लगती क्यूँ है?

आंसुओं में छुपे ग़म के परदे,
झिलमिल से करते हैं,
हाथो में पड़ी कोमल सिलवटें,
शिथिल से सरकते हैं,
कौन जाने ये वक़्त है या हम?
जिसके मौसम आज यूँ बदल गए से लगते हैं।

एकांत में बैठी कभी यही सोचती हूँ,
वक़्त ने जो दिखाया क्या वही मंज़र,
स्वयं ही घूम मेरे नज़दीक आ बैठा है,
या मैं ही स्वतः चलते चलते,
ज़िन्दगी की पुरानी गलियों में निष्प्राण पडी हूँ।


हर तरह के लोगों के लिए ब्यूटी टिप्स

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अगर मैं ये कहूं कि यहाँ मैं आपको कुछ ऐसे ब्यूटी टिप्स देने वाली हूँ जो आपको हमेशा जवान रखेगा और आपको हर  तरह के ख़राब मौसम से भी बचाएगा तो मैं कुछ बढ़ा चढ़ा  के नहीं कह रही। मगर मुझे एक बात यहाँ साफ़ साफ़ कहनी है की ये पोस्ट उन हज़ार तरह के आर्टिकल्स के जैसे नहीं है जो आपको आम ब्यूटी टिप्स देते हैं जैसे आप रोज़ अपने शरीर को आठ गिलास पानी से भरें या हफ्ते में दो या तीन बार उन चीज़ों से बने फेस मास्क लगायें जो नंबर में  उन चेहरों से भी ज्यादा हैं जितने आपने अपने अब तक के जीवन में नहीं देखा होगा। ये पोस्ट उन जैसे आर्टिकल्स जैसा नहीं है। यहाँ मैं असल ब्यूटी टिप्स की बात कर रही हूँ जो आपको हमेशा शानदार और खूबसूरत बनाये रखेगा भले ही आप किसी भी उम्र के हो, आपकी त्वचा अलग हो, आप स्त्री हैं या पुरुष इत्यादि। ये टिप्स आपके व्यक्तित्व के जादू को हमेशा बरकरार रखेगा। इन खूबसूरत टिप्स को अपने व्यक्तित्व के उपर ज़रुरत के हिसाब से अमल में लायें। उनका असर देखें और एक सितारे की तरह चमकते रहे...हमेशा।

तो देर किस बात की दोस्तों? चलिए काम की बात करते हैं।

सकारात्मक सोच रखें: अगर आप आनुवंशिक रूप से ब्लड ग्…

हमें सालगिरह क्यों मनानी चाहिए?

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मैंने अपनी ज़िन्दगी में बहुत लोगों को ये कहते सुना है की जन्मदिन, सालगिरह वगैरह क्यों मनाएं? आखिरकार ये हमारी ज़िन्दगी से  365,1/4 दिन कम करके एक साल कम कर देता है देता है और हमें हमारे मौत की तरफ ले जाता है. मुझे ये सुनके थोडा आश्चर्य होता है. ये सही है की ये हमारी ज़िन्दगी का एक साल कम कर देता है मगर फिर भी...हमें शुक्रगुज़ार होना चाहिए की हमें ये साल देखने का मौका मिला. जाने कितने लोग ये समय नहीं देख पाए होंगे. इस दिन हमारे चाहने वाले हमें फ़ोन, कार्ड्स या तरह तरह के मैसेज भेज के हमें विश करते हैं और बधाइयाँ देते हैं. जो ज्यादा चाहते हैं वो हमें कुछ उपहार भी दे देते हैं ;). मगर चाहे जो कोई भी हमें जिस तरह से विश करे, हमें ये अच्छा लगता है और दिल को सुकून देता है. हमें ये एहसास होता है की हमें कितने लोग चाहते हैं, हमारी ख़ुशी चाहते हैं और हमें हमेशा अपने पास देखना चाहते हैं. उनकी प्यार भरी बातों में हमारे लिए दुवाएं छुपी होती हैं.

हमारा जन्मदिन भले ही हमारी ज़िन्दगी से एक साल कम कर देता है मगर हमें एक और मौका देता है अपनों के साथ रहने का. ये दिन पूरी तरह से सिर्फ हमारा होता है. इस …