हमें सालगिरह क्यों मनानी चाहिए?


मैंने अपनी ज़िन्दगी में बहुत लोगों को ये कहते सुना है की जन्मदिन, सालगिरह वगैरह क्यों मनाएं? आखिरकार ये हमारी ज़िन्दगी से  365,1/4 दिन कम करके एक साल कम कर देता है देता है और हमें हमारे मौत की तरफ ले जाता है. मुझे ये सुनके थोडा आश्चर्य होता है. ये सही है की ये हमारी ज़िन्दगी का एक साल कम कर देता है मगर फिर भी...हमें शुक्रगुज़ार होना चाहिए की हमें ये साल देखने का मौका मिला. जाने कितने लोग ये समय नहीं देख पाए होंगे. इस दिन हमारे चाहने वाले हमें फ़ोन, कार्ड्स या तरह तरह के मैसेज भेज के हमें विश करते हैं और बधाइयाँ देते हैं. जो ज्यादा चाहते हैं वो हमें कुछ उपहार भी दे देते हैं ;). मगर चाहे जो कोई भी हमें जिस तरह से विश करे, हमें ये अच्छा लगता है और दिल को सुकून देता है. हमें ये एहसास होता है की हमें कितने लोग चाहते हैं, हमारी ख़ुशी चाहते हैं और हमें हमेशा अपने पास देखना चाहते हैं. उनकी प्यार भरी बातों में हमारे लिए दुवाएं छुपी होती हैं.

हमारा जन्मदिन भले ही हमारी ज़िन्दगी से एक साल कम कर देता है मगर हमें एक और मौका देता है अपनों के साथ रहने का. ये दिन पूरी तरह से सिर्फ हमारा होता है. इस दिन हम चाहे कुछ भी कर सकते हैं (कुछ भी से मतलब अच्छीचीज़ों से है जो खुशियाँ दे) और सबसे अच्छी बात ये होती है की...किसी को दुःख भी नहीं पहुँचता (जब तक की पहले से नाक ना टूटी हुई हो :P ).


ठीक इसी तरह हमारी शादी की सालगिरह भी होती है. लोग अक्सर ये कहते हैं की शादी का एक और साल कुशल मंगल से बीत गया जैसे कहना चाह रहे हों की दो दुश्मन देश आपस में रहते हुए एक साथ एक साल और गुज़ार लिए बढ़िया से. मुझे तो हंसी आ जाती है सुनके जब अपने ही पापा  से ये बात सुनती हूँ. वो ऐसा मज़ाक में कहते हैं सिर्फ मम्मी को चिढाने के लिए. उनका ये मतलब कभी नहीं होता. मगर जो लोग सच में ऐसा सोचते हैं मुझे दुःख हैं उनके लिए. उन्हें ऐसा नहीं सोचना चाहिए क्योंकि ऐसे कितने ही लोग हैं ज़िन्दगी में जो अकेलेपन का शिकार हैं. उनका साथ देने वाला कोई भी नहीं है. अगर आपके पास एक जीवन-साथी है तो उसके साथ हर पल ख़ुशी से बिताएं. एक प्यार भरी मुस्कान अच्छे अच्छों के गुस्से को शांत कर देती है. आपकी एक प्यारी से मुस्कान हमारे रूठे हुए जीवन-साथी का गरमा गरम मूड ठंडा कर सकती है; हमारा छोटा सा गिफ्ट उन्हें ये एहसास दिला सकता है की 'वो' हमारी ज़िन्दगी में हमारे लिए कितने ख़ास है. (और ये हमें कितने सारे फ़िल्मी डायलाग बोलने से बचा लेता है और हमारा टाइम भी)  

सालगिरह चाहे किसी भी अवसर का हो, हमें बेहद ख़ुशी और उमंग के साथ मनाना चाहिए क्योंकि अपनों के साथ शरीक होने का मौका बहुत ही कम लोगों को मिलता है.

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