1 December 2012

रोचक बातों से भरा एक शनिवार

आम सुबह से शुरू हुआ ये शनिवार दोपहर तक ढलते ढलते एक ऐसे दिन  बदल गया जिसमें कुछ खास नयी बातें हुई। ये सब कुछ ऐसे हुआ:

जब तक मेरे पति अपना नाश्ता करने के बाद अपने नवोदय मीटिंग के लिए निकले, तब तक मैंने भी निश्चय कर लिया था आज बाहर कहीं जाकर अपने बेटे के साथ एन्जॉय करने का (यहाँ एन्जॉय करने को आप गलत शब्दों में ना ले। इसका सामान्य सा मतलब है किसी शौपिंग मॉल या पार्क में समय बिताने का). वैसे भी मैं एक सुस्त सी इंसान हूँ जो ज़्यादातर समय अपने घर में ही व्यतीत करती है। अपना काम ख़तम करने के बाद मैं अपने नाश्ते का प्लेट लेके खाने बैठी। अपने स्वादिष्ठ आलू परांठे का आनंद लेते हुए मैंने अपने फेसबुक और मेल्स को चेक करना शुरू किया। जहाँ फेसबुक अब कुछ खास नहीं रह गया है सिवाय कुछ बेकार स्टेटस और  updates के, वहीँ मेरे मेल बॉक्स में एक मेल आया था जिसमे Bangalore में होने वाली क्लासेज/वर्कशॉप के बारे में विस्तार से दिया था। यूँ तो मैं इस तरह के मेल्स नज़रंदाज़ कर देती हूँ मगर फिर भी आज मैंने देखा और एक ऐसे वर्कशॉप के बारे में पता चला जिसमे बच्चों के लिए एक घंटे का X-mas tree को सजाने की activitiy थी। इसने मेरा ध्यान आकर्षित किया जिसे मैं और मेरा बेटा साथ में कर सकें। मैंने details देखी और दिए हुए फ़ोन नंबर पे कॉल करके सारी जानकारी इकट्ठी की। मैंने इस workshop को करने का निश्चय किया। मुझे ऐसी उम्मीद थी की मेरे बेटे को ये अच्छा लगेगा। मेरे पास एक घंटे का समय था अपना सारा काम ख़त्म करने का। मैंने जल्दी जल्दी सब किया और हम दोनों workshop शुरू होने के बीस मिनट पहले घर से निकल गए। थोड़ी सी परेशानी के बाद मुझे वो workshop की जगह मिली और क्या खूब...वो जगह एक बच्चों की लाइब्रेरी निकली जिसका नाम Discover Kids था। यह लाइब्रेरी पांच साल पहले से है और सामान्यतः एक बड़ी जगह पे बनी है। अलग अलग activities के लिए अलग अलग कमरे हैं। मैंने एक बड़े से X-mas tree को ढूंढना शुरू किया जिसे बच्चे कई सारी चीज़ों से सजाने वाले थे जैसे कि सांता क्लॉज़, कैंडीज,मेसेजेस इत्यादि। वो पेड़ एक काउंटर के बगल में रखा था और उसे देख के मुझे थोड़ी निराशा हुई। मैंने थोडा ज्यादा ही बड़े पैमाने पे सोच लिया था मगर जो था वो भी कोई निराशाजनक नहीं था। सारे बच्चे पास ही में रखे ट्रे में से चीज़ें निकाल के पेड़ को सजाने लगे। सभी खुश थे। अश्मित भी मन से शर्मीली मुस्कराहट के साथ कर रहा था। घर छोड़ने से पहले मुझे पता था की मैं फोटो लूंगी और मैंने सच में अपना कैमरा निकला और कुछ तसवीरें ली। उनमे से कुछ नीचे डाली हैं मैंने:

अश्मित X-mas पेड़ को सजाते हुए 

नन्हे सांता क्लॉज़ के साथ 

बच्चे अपना काम तन्मयता से करते हुए 

मैंने भी थोडा पेड़ की सजावट में हिस्सा लिया:


Activity ख़त्म करने के बाद मैं और अश्मित लाइब्रेरी देखने में व्यस्त हो गए। मुझे रोचक लगा और मैंने वहां उनकी सदस्यता के बारे में पूछताछ की। उन्होंने मुझे कई सारी बातें बताई और एक जिज्ञासु इंसान होने के नाते मैंने कुछ और प्रश्नों की झड़ी लगा दी। कुछ बात चीत और कुछ 'उ हूँ', 'आ हाँ' और 'ओके' के बाद मैंने उनका तीन महीने कि ट्रायल मेम्बरशिप ले लिया। कितनी विचित्र बात है न? जो दिन सिर्फ एक एक्टिविटी करने के साथ शुरू हुई थी, वही दिन एक लाइब्रेरी का मेम्बरशिप प्लान लेने के साथ आगे बढ़ी। लेकिन मुझे इस बात का कोई पछतावा नहीं है क्योंकि मैं कई दिनों से ऐसे क्लब/लाइब्रेरी की तलाश में थी जो शनिवार और रविवार को हो और जिसमें मैं अपने बेटे को भेज सकूं। कम से कम ये सब उसे एक अच्छा समय बिताने का मौका देगा और उसे उसके कार्टून्स से भी दूर रखेगा। उस लाइब्रेरी में बड़ों के लिए भी novels  थी। मुझे ये देख के बेहद ख़ुशी हुई और मैंने एक किताब उठाई जिसका नाम Paulo Coehlo की 'Like  the  river  flowing ' था। मैंने इनकी बहुत प्रख्यात किताब पढ़ी है 'The Alchemist' और सिर्फ इनका नाम किताब पर होने से ही मुझे अपनी उठाई हुई बुक पढने का मन किया। जहाँ अश्मित व्यस्त था अपनी चीज़ें देखने में वहीँ मैंने अपनी किताब पढनी शुरू की। शुरुआत के कुछ पेजेज ने मुझे कुछ एक बार हंसाया। विद्वान् लेखक जैसे की Paulo  Coehlo मजेदार वाकयों को ऐसे तरीके से लिखते है कि वो वाकया आपके लिए सबसे ज्यादा मज़दार बन जाता है। मुझे ये किताब बेहद पसंद आई और मैंने ये borrow कर ली और साथ में अश्मित की भी एक किताब। हम वहां  अगले दो घंटे तक और रुके। मैंने वहीँ पर एक और फ्रेंड भी बनाया और हमने एक दुसरे का फ़ोन नंबर भी शेयर किया (जैसे की ये बहुत अनोखी बात है जिसे मैं यहाँ बता रही हूँ). मैंने अपने बेटे के साथ मिलके puzzles बनाया, अपनी किताब से कुछ और पन्ने पढ़े और लाइब्रेरी की असिस्टेंट से कुछ और सवाल पूछे। अरे हाँ! मुझे लाइब्रेरी की ओनर को भी फ़ोन करना था। (कुछ मिनटों बाद) मैंने उनसे बात की और उनके द्वारा शुरू किये गए लाइब्रेरी जैसे अच्छे काम की सराहना की। उन्हें अच्छा लगा सुनके। देखा आपने, छोटी छोटी बातों में एक जादुई बात होती है।

वहां लाइब्रेरी में बैठने से एक बात मेरे दिमाग में कौंधी। मैं हमेशा से ही कुछ ऐसा करने का सोच रही थी जो मेरे आर्टिकल्स लिखने से अलग हो; जो मुझे मेरे लैपटॉप से दूर रख सके; जो मुझे ज़िन्दगी की आप धापी से बचा सके; जो मुझे बदले में कुछ खास दे (जैसे लोगों की सराहना और पैसे) लेकिन मैं बहुत निश्चित नहीं थी इस बारे में जब तक की मैं वहां लाइब्रेरी में नहीं गयी थी। मुझे वहां जाके ठीक वही चीज़ मिली जिसकी मुझे चाहत थी। किताबों और बच्चों के साथ रहना मुझे बहुत अच्छा लगता है। वहीँ से मैंने एक सपना देखा ....अपनी खुद का एक लाइब्रेरी खोलने का। इस लाइब्रेरी में बच्चों के साथ साथ बड़ों के लिए भी किताबें होंगी। मैं ये करूंगी...मैं वो करूंगी...मैं अपने ही दिमाग में सोचती और कहती रही। ऐसा मत सोचिये की एक अच्छी लाइब्रेरी को देखने से मैं ऐसे ही सपनों में चली गयी हूँ। ऐसा बिलकुल नहीं है। आपको एक ऐसे विचार की तलाश होती है जो आपको जब तक नहीं मिलती आपकी ज़िन्दगी में एक खालीपन सा रहता है; जैसे की कुछ छूट गया सा लगता है लेकिन जैसे वो विचार हवा से आये भूत की तरह आपके सामने आता है तो आप का वो खालीपन भर सा जाता है; आपको लगता है कि हाँ! ये वही विचार है जिसकी मुझे तलाश थी। ऐसा ही कुछ मेरे साथ भी हुआ। इस लाइब्रेरी को देखने से मुझे समझ आ गया की मैं अपनी ज़िन्दगी में एक और काम कौन सा करना चाहती हूँ। जब मेरे पास सारी ज़रूरी चीज़ें जमा हो जाएँगी तब मैं खुद की एक लाइब्रेरी खोलूँगी जो सबके लिए होगा। मेरी खुद की भी एक छोटी सी लाइब्रेरी है मगर एक बड़े पैमाने पे खोलने के एहसास ने मुझमें कई सारी उम्मीदें भर दी हैं। सबसे अच्छी बात तो ये है की मैं अपने परिवार के साथ भी समय बिता सकूंगी। शुभ कामनाओं के साथ मैं ये उम्मीद करती हूँ कि ये मेरा ये सपना एक दिन ज़रूर पूरा होगा। एक और बात...Discover Kids में internet भी है। इसका मतलब है कि मैं अपना लैपटॉप अगली बार ले जा सकती हूँ। देखा...कोई भी चीज़ मुझे मेरे लैपटॉप से दूर नहीं रख सकती।

लाइब्रेरी से आने के बाद मैंने अश्मित को एक बहुत बड़ा सरप्राइज दिया जब हम दोनों McDoanld's में lunch करने गए। उसकी ख़ुशी का एहसास तो आप सब कर ही सकते हैं। हमने वहां अपना लंच किया। जब हम घर वापस आये, एक और बढ़िया बात हुई। सुबह घर जाने से पहले मैंने The Vampire Diaries Season 4 Episode 7 डाउनलोड पे लगा के चली गयी थी जो की घर आने तक हो गया था। फिर मैंने उसे देखा और देख कर मुझे ख़ुशी हुई।

अपने घर के सोफे पे आराम से बैठ के आज दिन भर की रोचक बातों को लिखने में मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा है। McDonald's की चतुर नीति की वजह से शहर का हर  बच्चा वहां आता है। अश्मित को उसके Happy Meal के साथ Iron man मिला। अब Iron man  हमारे घर के superheroes की army में शामिल हो गया है और ये आर्मी Superman , Spiderman , Robin और Batman  से बनी है। पांच निष्क्रिय heroes हमारी ज़िन्दगी की कठिनाइयों से बचाने के लिए हमारे साथ हैं...कितनी रोचक बात है!

 इसी पोस्ट को English में आप यहाँ पढ़ें।












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