क्या करेंगे अगर सभी दरवाज़े बंद हो?

बहुत ही आम सा सवाल है न? ऐसे ही सवाल किसी व्यक्तित्व को निखारने या खुद को विकसित करने जैसे क्लासेज में बताये जाने वाला लगता है? मगर ये सवाल ऐसी किसी भी जगह से नहीं आया है। बल्कि ये मेरी  ज़िन्दगी के अनुभवों में से एक है जो आज मेरे ब्लॉग पर अंकित होने जा रहा है।

एक समय ऐसा आया था जब ज़िन्दगी ने मुझसे यही सवाल पूछा था और मैंने जवाब भी दिया था। जवाब थोडा मुश्किल था; बल्कि बहुत ही मुश्किल मगर मैं अपने शब्दों से पीछे नहीं हटी चाहे कैसी भी परिस्थितियां मुझे झेलनी पड़ें या ज़िन्दगी मुझे कितना ही कठोर समय दिखाए मगर मैं अपने जवाब पर से नहीं हटी। मैंने जो कहा पूरे दिल से कहा और कभी अपने शब्दों को बदला नहीं। क्या हो अगर मैं वही सवाल आपसे पूछूं? क्या हो अगर वो सारे दरवाज़े बंद हो जिससे आप बाहर जा सकते हैं?

मैं जानती हूँ की हम में से बहुतों का जवाब होगा: एक खिड़की ढूंढ लो तब। मगर क्या आप मेरे सवाल का जवाब पूरी इमानदारी और सच्चाई के साथ दे रहे हैं? ऐसे जवाब मैंने कई लोगों से सुना है, कभी कभार अपने फेसबुक वाल पे पढ़ा है और कितनी ही किताबों में भी इसे पढ़ा है। सभी एक जवाब बदले में देते हैं: एक खिड़की ढूंढ लेनी चाहिए। और मुझे यकीन है कि आप संभवतःऐसा जवाब पहले से पढ़े होने की वजह से दे रहे हैं ना कि आपने सच में कभी इस सवाल का जवाब ढूँढने की खुद से कभी कोशिश की है।

मगर क्या करेंगे अगर एक भी खिड़की न हो? क्या करेंगे अगर एक बहुत ही छोटी सी खिड़की हो जिससे बाहर आना असंभव हो? क्या हो अगर वो खिड़की इस कदर बंद हो की उससे सूर्य की एक भी किरण अंदर ना आने पाए? क्या करेंगे अगर आप ज़िन्दगी की चार दीवारों में एक सवाल के घेरे में पूरी तरह से बंद हो: क्या करेंगे अगर सभी दरवाज़े बंद हो?




आम उत्तर देने के बदले मैंने अपने तरीके से ज़िन्दगी को जवाब दिया। मैंने सिर उठा कर कहा: मैं ताला ही बदल दूँगी और मैंने ऐसा किया भी। मैंने उत्तर को बदल दिया और ज़िन्दगी, जो की दूसरों को अपने आगे झुकाने की आदि हो चुकी थी, ने मुझे एक ज़ोरदार तमाचा मारा था। ऐसा नहीं था कि मैं कोई बदलाव लाने निकली थी। मैंने जो किया मैं वही करने को बाध्य थी। मेरे पास एक कायरता भरा रास्ता भी था जिसे करने से मुझे और मेरे परिवार को दुःख पहुंचता। ये रास्ता ठीक उसी खिड़की की तरह था जो पूरी तरह से बंद थी जिसमें आशा की कोई किरण नहीं आ सकती थी और जिससे बाहर आकर मुझे कोई रास्ता नहीं मिलता। मैं ऐसी इंसान नहीं हूँ जो ज़िन्दगी की कठिनाइयों से दूर भागने में विश्वास करती है। मैं ज़रा भी ऐसी नहीं हूँ मगर मैं अपनी ज़िन्दगी में कोई कठिनाई चाहती भी नहीं। मुझे जो सही लगता है मैं वही करती हूँ। मैंने अपना रास्ता खुद चुना और बदले में ज़िन्दगी ने मुझे एक बेहतरीन पुरस्कार दिया; ऐसा पुरस्कार जिसमे दुःख, आंसू, अकेलापन, अपमान, नफरत, सही और गलत में पहचान की क्षमता का नुक्सान और कौन से लोग मेरा साथ पसंद करते हैं और कौन मुझे अपनी ज़िन्दगी से बाहर करके सुकून महसूस करते हैं जैसे मुश्किल कांटे थे। ज़िन्दगी ने असलियत का एक बहुत डरावना भयानक सा चेहरा मुझे दिखाया शायद ये सोचकर कि मैं डर जाउंगी। मगर अगर ज़िन्दगी खुद इतनी कठोर है कि अपनी ज्यादतियों को नहीं सही कर सकती तो मैंने भी अपनी पीठ पूरी तरह से मजबूत बना ली। हर मुश्किल को सहने की हिम्मत मुझे बटोरनी पड़ी।

मुश्किलें आप में एक नए इंसान को उभारती हैं। कभी कभार आप ऐसा इंसान बन जाते हैं जिसे प्यार कम और नफरत ज्यादा मिलती है। यहाँ तक कि आपका परिवार भी आपसे दूर होने लगता है। वो प्यार जो कभी आपके अपनों की आँखों में आपके लिए था, आंसुओं और मजबूरी में बदल जाती है। वो आँखें सब जगह देखती हैं मगर आपको नहीं। ऐसे में बहुत दुःख पहुंचता है मगर मैंने कोई शिकायत नहीं की। ज़िन्दगी के अपने ही तरीके  हैं सिखाने के लिए। ये मेरी सबसे अच्छी और सबसे मजबूत शिक्षक है। इसने मुझे ज़िन्दगी के कुछ बेहद कठोर अध्याय मेरी पीठ पर अपनी चाबुक के मार से सिखाई है; मेरी आँखों को अनगिनत आंसुओं और नीन्दरहित रातों से दुखाया है; मेरे खिलाफ साज़िश रच कर मेरे अपनों को मुझसे दूर रखा है; अपने जिनसे मैं सबसे ज्यादा प्यार करती हूँ और जो मेरे लिए सब कुछ हैं। चूँकि मुझे अपनों की भलाई किसमें है का पता था, मैंने अपना जवाब तब भी नहीं बदला। एक अच्छा विद्यार्थी बनना आसान नहीं और खासतौर से तब जब उन आँखों पर चढ़े चश्मों के पीछे ज़िन्दगी रुपी शिक्षक खड़ी हो। इसने मेरी कड़ी परीक्षा ली और आज जबकि वो कठिन दौर चुका है और मेरा परिवार  मेरे साथ है, मुझे अब समझ आता है कि इसने मुझे क्या सिखाया। ज़िन्दगी सबसे कठोर अध्यापक होने के नाते इसने अपनी हर एक चाबुक की मार से मुझे सहने की कला को सिखाया; हर एक आंसू से इसने मेरे देखने के नज़रिए को साफ़ किया जिससे में सही और गलत में पहचान कर सकूं; मुझमें ऐसी हिम्मत जगाई जिससे मैं अपनाआप को उन अकेली नींद रहित रातों में खुद को समेत सकूं और मुझे अपनों के महत्व को उन्हें मुझसे दूर करके एहसास कराया जिनसे मैं प्यार करती हूँ ताकि मैं फिर कभी उन्हें ऐसी तकलीफ ना पहुंचा सकूं। मैं ऐसा नहीं कहती कि मैं बहुत बहादुर हूँ मगर हाँ! अगर मेरे परिवार के लिए सबसे अच्छा करने की बात जहाँ पे भी आएगी, मैं वो सब करूंगी जो मुझे करना चाहिए।

जब आप गलती करते हैं तब ज़िन्दगी अपने ही विचित्र तरीकों से आपको सिखाने आती है। कभी उसका तरीका आपको तकलीफ पहुंचता है तो कभी आपको आराम भी पहुंचता है। चाहे जो भी हो, हम सभी अपने सबसे अच्छे शिक्षक के साथ हमेशा रहते हैं और जैसा कि हम सबको पता है कि एक शिक्षक के साथ रहना कभी आसान नहीं होता। जब आपको लगता है समय बढ़िया है और आप आराम से जीने लगते हैं तभी उसी क्षण ये आपकी परीक्षा लेने के लिए तैयार हो जाती है; अक्सर बेहद ही कड़ी परीक्षा। अगर आप सफल हो जाते हैं तब ये आराम से रहती है और आप पर मेहरबान रहती है और अगर गलती से भी आप काँप गए या फेल हो गए तब आपको एक और पाठ पढ़ाने के लिए कमर कस लेती है। चुनाव आपको करना है। या तो आप निडर होकर सही जवाबों को देने के लिए हमेशा तैयार रहे या फिर कहीं छुप जायें जिससे ये हमेशा आपको हराने के लिए खड़ी रहे। ये आपको कभी छोड़ेगी नहीं जैसा कि Louis Hector Berlioz ने अपनी एक पंक्ति में कहा है: Life is a great teacher but unfortunately it kills all its pupils यानि ज़िन्दगी एक बेहतरीन शिक्षक है मगर दुर्भाग्य से ये अपने शिष्यों को कहीं का नहीं छोड़ती। उनका मतलब शायद डर से भरपूर शिष्यों से रहा होगा :)

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