13 January 2013

प्रकृति के साथ एक मुलाक़ात :: नंदी हिल्स

अगर मैं अपने आखरी तीन दिनों को तीन बिस्किट्स की तरह बताऊँ तो कोई गलत बात नहीं होगी। ज़िन्दगी एक बैग की तरह है जिसमे हमें कितने ही अलग अलग तरीके के बिस्किट (घटनाएं) मिलते हैं जो हमें कितने ही तरह के स्वाद (एहसास) देते हैं। कुछ बिस्किट स्वादिष्ट होते हैं तो कुछ कडवे। मेरा पहला स्वाद काफी निराशाजनक था और मुझे ज़रा भी पसंद नहीं आया। मेरी कार से मेरा एक छोटा सा एक्सीडेंट हो गया था। इसका असर बहुत ही दुखदायी था और मुझे काफी तकलीफ हुई थी। इससे बाहर आने में मुझे थोडा समय लगा।

दूसरा स्वाद हमारा एक छोटा सा खूबसूरत सफ़र था :: Nandhi hills और ये बहुत ही बढ़िया रहा। हम वहां कल सुबह यानी कि Saturday को गए थे और इसके हर एक पल का हमने खूब आनंद लिया। कोई भी बात जो किसी सफ़र की तरह खूबसूरत होती है उसे तो मेरे ब्लॉग पर लिखना ज़रूरी होता है। तो आइये मैं बताती हूँ कि कैसे हमारा Saturday शुरू हुआ और किस तरह एक बहुत ही अच्छे अनुभव के साथ ख़तम हुआ।

नंदी हिल्स बैंगलोर से 67 कि.मी. दूर है और चिक्काबल्लापुर जिले (कर्नाटक) में स्थापित है। मैं, सुमित और अश्मित सुबह 4 बजे उठ गए थे और हमने अपना घर 5.30 तक छोड़ दिया। जब हम बाहर सड़क पर  आये तो मैंने देखा कि चारों तरफ कुहरा और धुंध छाया हुआ है। ये देख कर मुझे सुखद आश्चर्य भी हुआ क्योंकि अभी तक इस मौसम में बैंगलोर में ठण्ड नहीं आई है। दिन के समय गर्मी होती है और शामें हमेशा की तरह खुशनुमा। मगर अपने चारों तरफ ऐसा धुंध भरा माहौल देख के बहुत ही अच्छा लगा।सुमित के सफ़र के सबसे अच्छे साथी Google maps की मदद से हम सुबह में 7 बजे ही पहुँच गए थे (मात्र डेढ़ घंटों में). सफ़र के दौरान बहुत सारे हेयर पिन बेंड्स (घुमावदार सड़कें) थे जिसे हमने काफी एन्जॉय किया। नंदी हिल्स पर्वतों, पेड़ों, हरे भरे घास और जंगलों से भरी हुई एक आकर्षक जगह है जिसका अनुमान आप नीचे दिए गए पिक्चर से लगा सकते हैं ::

कार से ली गयी पिक्चर 

तब हमने काउंटर से टिकट लिया जिसका मूल्य अस्सी रुपए था और हम उपर पहुंचे। जैसे ही हम उपर पहुंचे उसी वक़्त मुझे अपना कार्डिगन निकालना पड़ा क्योंकि वहां बहुत ही ठण्ड थी। मौसम बहुत ही ठंडा और सुहावना था। सूरज पहले ही निकल चूका था और हम थोड़ी बहुत गर्माहट महसूस कर सकते थे। लोग कहते हैं कि नंदी हिल्स पे जाने का सबसे उपयुक्त समय सुबह सुबह ही होता है जब सूरज नहीं निकला हो क्योंकि अक्सर लोग वहां सूरज का उगना ही देखने जाते हैं जो कि बहुत ही सुंदर होता है। हम वो तो नहीं कर सके मगर हाँ! बहुत सारी दूसरी यादें हम साथ घर लाये।

वहां पहले से ही बहुत लोग थे और एक खुशनुमा वातावरण चारों तरफ था। लोग बातें कर रहे थे, अपने दोस्तों और प्रिवार के साथ मज़े ले रहे थे और बहुत सारे फोटोज भी खींच रहे थे। हम एक ऊंचे से राफ्ट पर गए जो कि एक बड़े से खुले मैदान से जुड़ा हुआ था। हवाएं तेज़ थी और दृश्य प्रकृति से भरपूर था। वहां पर बहुत ही शांति और सुकून था। हमने भी अपने पिक्चर्स लिए ::

ये हवाएं...जुल्फों में मेरी गुम हो जायें :) 

माँ बेटे की जुगलबंदी :)

और जैसा कि मैंने उपर बताया एक खुले बड़े मैदान के बारे में वो कुछ ऐसा था ::

  


उसके बाद हम कुछ पॉइंट्स जैसे Tipu's drop, Children's playground, Nehru's Nilaya, Gandhi house इत्यादी देखे। वहां चलना फिरना बहुत था मगर हमने इसका भी खूब आनंद लिया। आप भी नंदी हिल्स के बारे में इन लिंक्स से अपनी जानकारी बढा सकते हैं :: Wikipedia और Nandhi Hills. यहाँ शहरों में जहाँ हमें प्रकृति का साथ बहुत कम मिलता है वहां इसका आनंद लेने की बात तो दूर की है। इसीलिए ये ट्रिप ज़िन्दगी की आप धापी से दूर रहने का एक बढ़िया जरिया बना। हमारे बेटे अश्मित ने भी खूब एन्जॉय किया ::

आइस क्रीम खाने का मज़ा ही कुछ और है :)

नंदी हिल्स चार नदियों का उद्गम स्थान भी है -- Penner, Ponnaiyar, Palar and Arkavathy. हमने चाय और कॉफ़ी का भी मज़ा लिया जो पहाड़ों के बीच बहुत ही आरामदायक लगता है। बाद में हमने आइस क्रीम भी खायी। वहां पर एक डोसा स्टाल भी था और एक रेस्टोरेंट भी। चूँकि हमने अपने घर छोड़ने से पहले नाश्ता साथ रख लिया था तो हमने वही खाया (इससे हमें रास्ते में अनावश्यक रुकने की ज़रुरत नहीं पड़ी और हमारा समय भी बचा).

घुमते समय हमने बहुत तरीके से मस्ती की ::

ऐसा मौका छोड़ना मुश्किल है

मेरे बालों में फूल लगाते हुए

ट्री हाउस में जाते हुए

भविष्य के धावक :)







सब तरह से देखा जाए तो नंदी हिल्स बहुत ही अच्छा और ताजगी से भर देने वाला अनुभव था। इसने हमें एक बार फिर ये एहसास दिलाया कि हम प्रकृति के बिना अधूरे हैं। शहर में कुछ काम करते हुए हम दोपहर 3 बजे वापस आये। हम इस ट्रिप से और सुबह जल्दी उठ जाने की वजह से बहुत थक गए थे मगर इतनी तकलीफ उठाने का हमें कोई अफ़सोस नहीं था।

हमारा दिन बस यहीं ख़त्म नहीं हुआ। एक और बढ़िया बात मेरा इंतज़ार कर रही थी और वो एक अवसर था एक प्रसिद्ध लेखिका से मिलने और बातें करने का। वो कौन है? इसे आप मेरे अगले पोस्ट में जानिए। अब जाते जाते मैं अपनी एक और एक फोटो यहाँ देती हूँ जो नंदी हिल्स ट्रिप के आखरी पलों में ली गयी थी। हम ख़ास तरीके के टेंट पर आराम फरमा रहे थे जो देखने में कुछ इस तरह से था ::




और मुझे लगता है कि ये मेरी अब तक की बेहतरीन फ़ोटोज़ में से एक है (सारा श्रेय मेरे फोटोग्राफर को जाता है -- सुमित)

सुकून  से भरा एक पल














इसी पोस्ट को ENGLISH में यहाँ पढ़ें :: A meet with nature :: Nandhi hills















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