15 January 2013

आप अपनी लाइफ कैसे मैनेज करती हैं?

ये सवाल कितनी ही प्रोफेशनल (व्यावसायिक) औरतों को गुस्सा दिलाने वाला, उसे बढाने वाला और  परेशान करने वाला लग सकता है और ये स्वाभाविक भी है। आप अपनी ज़िन्दगी कैसे मैनेज करती हैं? या सटीक तरीके से कहा जाए तो, आप अपनी व्यक्तिगत और व्यावसायिक लाइफ कैसे सही तरीके से रखती हैं एक साथ? बहुत सारी काबिल औरतें इस सवाल का जवाब कुशलता से दे सकती हैं मगर इसका मतलब ये नहीं की ये बात सोच विचार योग्य नहीं है। ये ज़रूर से सोच का एक विषय है।

सदियों से भारतीय समाज में औरतों को वो मुकाम नहीं मिला जिसकी वो हक़दार हैं। जहाँ आदमियों को बिना सोचे विचारे कितने ही सारे पद दे दिए जाते हैं वहीँ औरतों को कंधे के बराबर खड़े देखना पसंद नहीं किया जाता। इस संकीर्ण मानसिकता को कुछ महिलाओं ने तोड़ा तो है मगर फिर भी, ये कंकड़ समान सवाल कहीं से भी निकल के हमारे सामने आ खड़ा होता है।

"आप अपनी ज़िन्दगी कैसे मैनेज करती हैं?"

पहले मैंने कभी भी इस सवाल पर जोर नहीं दिया था मगर कुछ दिनों पहले इसने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया। जब मैंने बहुत सोचा विचारा तब मुझे इसका उत्तर मिला और अब ये सवाल हंसी मज़ाक में उड़ा  देने वाला नहीं रह गया है। क्यों नहीं ये सवाल पुरुषों से पूछा जाता है? क्यों नहीं?

ध्यान से सोचें तो इसका उत्तर किसी गर्मी की दोपहर के आसमान जैसा साफ़ नज़र आएगा। क्योंकि औरतों को उनके माता-पिता, पति (बच्चे भी, अगर हैं तो), ससुराल वाले और सबसे बुरा, औरत के खुद को ही उपर देखने की सोच का सहारा नहीं मिलता। जब वो कुछ पाना चाहती है तो दुसरे उसको अपना सपोर्ट देना बंद कर देते हैं। ये उसकी ज़िन्दगी को मुश्किल, उसकी काबिलियत को कमज़ोर बनाता है और ठीक यही वजह उसके लिए जीवनदायिनी बन संघर्ष करने वाला कारण बन जाती है।

जब भी कभी किसी औरत ने अपने घर के साथ साथ बाहर की दुनिया में कदम रखने की सोची है तभी कोई संकीर्ण मानसिकता उसके रास्ते में आ जाती है जो उसे बेवजह की बातों पर संघर्ष करने को मजबूर कर देता है जबकि यही बात आदमियों के लिए बिलकुल ही उलट है।

पुरुषों को हर एक दिशा से सपोर्ट मिलता है; चाहे वो माता-पिता से हो या बीवी से या बच्चों से या फिर किसी और से। हर कोई परिवार को चलाने वाले को सपोर्ट करने के पक्ष में रहता है। और ठीक यही वजह है कि उन की ज़िन्दगी तुलनात्मक रूप से आसान होती है। हर तरह के सपोर्ट की वजह से वो अपना काम औरतों की अपेक्षा ज्यादा आसानी से कर सकता है। इसीलिए कोई भी पुरुषों से ये सवाल नहीं पूछता।

हमारे समाज में ऐसे भी पुरुष हैं जो एक साथ कई अलग अलग चीज़ों को सम्हालते हैं। ऐसे लोग आसमान में उल्का जैसे होते हैं। मैं ऐसे पुरुषों की बहुत इज्ज़त करती हूँ मगर दुर्भाग्य से, ऐसे पुरुषों की संख्या कम है।

अपनी रीढ़ को अपना सबसे बड़ा सहारा मानते हुए एक औरत अपनी ज़िन्दगी के तमाम पहलुओं को इस तरह से मैनेज करना शुरू करती है जैसे कि पहले कभी न किया गया और इसी से वो प्रबंधन के गुणों में दक्ष हो जाती है। और तब वो अपनी दोनों जिंदगियों को सम्हालने में पारंगत हो जाती है। वो आसानी से एक पत्नी/माँ से एक प्रोफेशनल इंसान या इसके विपरीत में बदल सकती है।

जब कोई औरत अपनी एक अलग पहचान बनाने के संघर्ष में लगी हो तो कृपया उसे ऐसे सवालों से परेशान ना करें। बल्कि, उसे उसकी प्रबंधन (मैनेजमेंट) योग्यता की वजह से सराहें चाहे उसे कोई सपोर्ट मिल रहा हो या नहीं। ये उसकी अंदरूनी क्षमता को बढ़ाएगा और उसे एक खुले आसमान में उड़ने का साहस देगा।

एक औरत को एक पुरुष जितना ही सपोर्ट चाहिए

एक औरत आपकी ज़िन्दगी को आसान बनाती है। उस पर विश्वास कीजिये, उसका साथ दीजिये। ये आपकी ज़िन्दगी को और भी आसान बना देगा।

इसी  को  ENGLISH  में यहाँ पढ़ें :: How do you manage your life?















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