निर्भया के लिए अमिताभ बच्चन की विलक्षण श्रद्धांजली

                                                                      

 आज मैंने एक कविता पढ़ी जो महान कलाकार अमिताभ बच्चन द्वारा लिखी गयी है। उन्होंने इस कविता को दिल्ली में हुए बलात्कार की शिकार लड़की को समर्पित किया है (दिसम्बर 16, 2012). जब मैंने इसे पढना शुरू किया तब मैं खुद को इसे ख़तम करने से रोक ही नहीं पायी। ये इतना मार्मिक और असरदार है कि ये आपके दिमाग में एक भंवर की तरह बनकर एक बिंदु पर केन्द्रित हो जाता है :: निर्भया (असल नाम :: ज्योति सिंह) का दुःख और निवेदन।

मैं इस कविता को अपने ब्लॉग में शेयर करने जा रही हूँ ताकि ये इसका अभिन्न हिस्सा बन सके और मुझे इसे दोबारा ढूँढने में परेशानी न हो।

माँ! बहुत दर्द सह कर...
बहुत दर्द देकर तुझसे कुछ कह कर मैं जा रही हूँ ...
आज मेरी विदाई में जब सखियाँ मिलने आएँगी ...
सफ़ेद जोड़े में लिपटी देख सिसक सिसक मर जाएँगी ...
लड़की होने का खुद पर वो अफ़सोस जताएंगी ....

माँ! तू उनसे इतना कह देना दरिंदों की दुनिया में संभल कर रहना ...
माँ! राखी पर जब भैया की कलाई सूनी रह जाएगी ...
याद मुझे कर कर जब आँख उनकी भर जाएगी ...
तिलक माथे पर करने को माँ मेरी भी रूह मचल जाएगी ...
माँ! तू भैया को रोने न देना ...
मैं साथ हूँ हर पल उनसे कह देना ...

माँ! पापा भी छुप छुप बहुत रोयेंगे ...
मैं कुछ न कर पाया ये कह कर खुद को कोसेंगे ...
माँ! दर्द उन्हें ये होने ना देना ...
इलज़ाम कोई लेने ना देना ...
वो अभिमान है मेरा सम्मान है मेरा ...
तू उनसे इतना कह देना ...

माँ! तेरे लिए अब क्या कहूं.... 
दर्द को तेरे शब्दों में कैसे बांधूं.... 
फिर से जीने का मौका कैसे मांगूं ....

माँ! लोग तुझे सतायेंगे ...
मुझे आज़ादी देने का तुझ पर इलज़ाम लगायेंगे ...
माँ! सब सह लेना पर ये ना कहना ...
'अगले जनम मोहे बिटिया ना देना'...

ये कविता मैंने ठीक उसी तरह यहाँ शेयर की है जिस तरह से मिस्टर बच्चन ने लिखी है। ये दिल को इतना छू लेने वाला है कि आपका दिल तड़प उठेगा जब आप इसे पूरा पढेंगे। ऐसे ही विचार बलात्कार से पीड़ित हर लड़की के मन में मरने से पहले आता होगा 

अमिताभ बच्चन इतने ऊंचे व्यक्तित्व हैं कि अगर मैं उनके लिए कुछ कहना भी चाहूं तो पहाड़ के सामने तिल बराबर लगेगा मगर फिर भी...बहुत अच्छी कविता लिखी है आपने मिस्टर बच्चन और फेसबुक पर शेयर करने के लिए धन्यवाद। 

इसी पोस्ट को ENGLISH में यहाँ पढ़ें :: A remarkable tribute by Amitabh Bachchan for Nirbhaya















Comments

  1. ये कविता अमिताभ जी ने नहीं मैंने लिखी है बिना पूरी जानकारी के कुछ भी लिखना बहुत गलत है

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