हर चीज़ की एक कीमत है .

सुबह की चाय की बात ही कुछ और होती है। और जब आपके आस - पास शांति हो तो कितनी ही बातें हम चाय की चुस्कियों के साथ सोच लेते हैं, ह्रदय की गहराईयों में समा लेते हैं। सुबह की चाय पीते - पीते ही जब मैंने खिड़की के बाहर देखा तो जानते हैं क्या पाया ? इस खूबसूरत शांत सुबह की छाँव में कई सारे हरे भरे पेड़।  उन पेड़ों को ही देख कर ये ख़याल आया कि हर चीज़ की एक कीमत है इस दुनिया में।

पेड़ - ये हमारे प्रकृति के ज़िद्दी सैनिक हैं। यूँ तो स्कूल की किताबों में चार ही प्रकार के मौसम का समावेश है पर अगर हम ध्यान से सोचें तो चार से भी ज़्यादा निकलते हैं - गर्मियों में अचानक हुई बर्फ़बारी , सर्दियों में निकली तेज़ धूप, बारिश के मौसम में सूखा तो पतझड़ के समय नयी विकसित कलियाँ - कितने ही मौसम हमारे सामने आते और गुज़र जाते हैं। और इंसानो द्वारा प्रकृति पर किये गए प्रतिघात (brunt, attack) को कैसे भूल सकते हैं ? इतने  सारे मौसमों को झेलते हुए भी ये पेड़ अपना काम करते जाते हैं, अपने विकास में कमी नहीं आने देते।  और जब अचानक से उनकी शाखाओं की ग्रंथियों (nodes) में छोटी - छोटी नयी कलियाँ , नन्ही पत्तियां और ताज़े फल आ जाते हैं तो वो सारे मौसम, वो सारे प्रतिघात स्वतः ही एक कीमती प्रारूप धारण कर लेते हैं। हर मोर्चे पर विकास के लिए लड़ा गया युद्ध फलित हो जाता है।

कितनी खूबसूरत बात है कि हमारे सामने ही प्रकृति ने कितने साधारण मगर कितने मनमोहक रूप में ज़िन्दगी जैसे मौसम में स्वयं के विकास से लड़ते रहने के लिए ऐसे कई उदाहरण प्रस्तुत किये हैं। आप अपने आस पास देखिये या स्वयं का ही अवलोकन कीजिये, आपको बात बेहतर समझ आ जाएगी।  


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