विमेंस डे का जश्न - एक बदलाव जो मुझे चाहिए

तो आज विमेंस डे है। सबसे पहले मैं सारी औरतों को दिल से बधाई देती हूँ। और उम्मीद करती हूँ कि हम यूँ ही स्त्रीत्व के गुणों जैसे प्रेम, ताकत, संवेंदनशीलता आदि को बरकरार रखने की कोशिश जारी रखेंगे।

आज सच में कुछ अलग सा महसूस हो रहा है।  शायद ख़ास दिनों का हमारे ऊपर यूँ ही असर होता है।  ऐसा लग रहा है जैसे मैंने बूस्ट पी लिया है और मुझमे काफी उत्साह सा आ गया है। पिछली रात चार घंटों से भी कम सोने और दिन भर बिना झपकी के गुज़ार लेने के बावजूद ऊर्जा का संचार हो गया है। कितने दिनों बाद आज मैंने नेल पोलिश भी लगाया है और अच्छा भी लग रहा है। मैंने एक ख़ास विडियो भी बनाया है जिसमें मैंने उन सभी औरतों को अंकित किया है जो मुझे ज़िन्दगी में महत्वपूर्ण शिक्षा देती हैं और साथ ही साथ कई मुकाम पर मुझे आशान्वित भी करती हैं मगर जब मैं वो विडियो यहाँ पोस्ट करने आती हूँ तो ना जाने क्यों आ नहीं रहा। तो अब मुझे blogger के ऊपर थोड़ी नाराज़गी सी हो रही है यद्यपि आज के दिन कई लोगों ने मुझे बधाइयां दी और मैं बहुत शुक्रगुज़ार हूँ उन सभी की।

अगर आप मुझसे पूछेंगे कि कैसा लगता है एक औरत होकर तो मेरा जवाब कुछ ऐसा होगा - औरत होना एक गौरव की बात है ; एक दुर्लभ और ख़ास एहसास ; खूबसूरत भी और उम्मीदों से भरा भी। हालाँकि बढ़ते अपराध को देखते हुए काफी दुःख भी होता है। औरत होने का मतलब तनावयुक्त भी होना है मगर क्या हम सभी को, कम या ज़्यादा, ऐसे ही अनुभवों से नहीं गुज़ारना पड़ता ? सारी बातों की एक बात, मुझे ख़ुशी होती है एक औरत होकर।

मगर मुझे एक बदलाव भी चाहिए। मैं लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देना चाहती हूँ। कन्या भ्रूण हत्या को मिटा देना चाहती हूँ। मैं लड़कियों और औरतों को अपनी आवाज़ पहचानने को उत्साहित करना चाहती हूँ। मैं चाहती हूँ पुरुष औरतों को अपने मनोरंजन की वस्तु समझना बंद कर दें। मैं चाहती हूँ कि लड़के और पुरुष बराबरी का महत्व जान सकें।  मैं उन औरतों को सलाम करना चाहती हूँ जिन्होंने अपनी सीमा का विस्तार किया, अपनी श्रेष्ठता से बढ़कर काम किया। मैं गाँव और छोटे कस्बों की औरतों की सराहना करना चाहती हूँ जिनमे हिम्मत और आत्म-विश्वास का संचार हो रहा है। मैं उन पुरुषों को भी सराहती हूँ जो स्वार्थ से परे समाज के दुसरे आधे हिस्से की बेहतरी के लिए अनवरत काम कर रहे हैं।

और मैं ऊपर कही गयी एक या सारी बातों पर काम करना चाहती हूँ।

कितना कुछ कह दिया मैंने सिर्फ एक बदलाव के नाम पर लेकिन शुरुआत भी तो एक से होती है , जड़ों से ही समस्या का समाधान होता है।  अगर मैं आपसे पूछूँ कि आप ऐसा कौन सा बदलाव चाहते हैं जिससे ये दुनिया औरतों के लिए एक उम्दा जगह बन जाए तो क्या जवाब होगा आपका?

इसी पोस्ट को इंग्लिश में पढ़ने के लिए मेरे इंग्लिश ब्लॉग की इस लिंक पर जाएं: Celebrating Women's Day - The change I want


Comments

Popular posts from this blog

निर्भया के लिए अमिताभ बच्चन की विलक्षण श्रद्धांजली

क्या प्यार ही सब कुछ है ?