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Showing posts from May, 2017

मैं, मेरा बेटा, भतीजी और गिटार

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अगर आपको लगता है कि प्यार ही सिर्फ वो ताक़त है जो आपको मदहोश कर सकता है तो मैं कहूँगी आप गलत हैं। आज शाम जिस तरह की बारिश हुई, उसने प्यार को एक बहुत बड़ी चुनौती दी है। मौसम बहुत ही खुशनुमा हो गया था। अभी भी अच्छा ही है। इसी वजह से शायद कॉफ़ी की एक ग़र्म प्याली मेरे साथ है। अगर आपको भी तलब लग रही हो तो आप भी अपने लिए भी एक की व्यवस्था कर सकते हैं। 
तो आज मैं आप सभी से एक बहुत ही प्यारी वीडियो शेयर करने के लिए आयी हूँ। हाल ही में मैं अपने माँ-बाप के घर गयी थी। वहां एक शाम मैं अपने गिटार पर गाने गाकर रियाज़ कर रही थी कि मेरी भतीजी आ गयी।  मैंने उसे भी साथ गाने को कहा। इसी सिरे में मेरा बेटा भी जुड़ गया। क्या ही पता था कि उस शाम की वो हलकी फुलकी सी मस्ती दिल में एक अच्छा सा वीडियो बनाने की ख्वाहिश पैदा कर देगी। तो कुछ दिनों बाद एक रात सभी के लिए डिनर में पिज़्ज़ा बनाने के बाद हम तीनों मेरे भाई के कमरे में चले गए। दो बातें -  एक तो मैं बहुत थक गयी थी , २. मेरी भाभी को भी दिन भर की  थकान थी मगर फिर भी मेरे आग्रह पर उन्होंने मुझे कुछ समय के लिए अपना कमरा इस्तेमाल करने दिया। मैं आभारी हूँ अपने भाई औ…

कैसा होना चाहिए एक शिक्षक को

आज दोपहर में जब मैं टीवी देखने बैठी तो The Millers (द मिलर्स) आ रहा था। वैसे तो मुझे The Middle या Friends देखना ज़्यादा पसंद है मगर द मिलर्स भी अच्छा लगा। इस एपिसोड में एक अभिमानी महिला शिक्षक अपने विद्यार्थियों द्वारा उसके लिए वैलेंटाइन डे पर लिखे गए प्रशंसा पर अभिभावकों के सामने काफी इतरा रही थी। वहीँ हॉल में भूतपूर्व शिक्षक भी  मौजूद थी (वो भी एक महिला ही थी) . जब वर्त्तमान महिला शिक्षक अपनी तारीफ करने में मशगूल थी, भूतपूर्व महिला शिक्षक सोच रही थी कि उसके किसी विद्यार्थी ने उसके लिए कभी अच्छा क्यों नहीं कहा। वर्त्तमान शिक्षक के बड़बोलेपन से तंग आकर, वो भूतपूर्व शिक्षक नाराज़  होकर चली गयी मगर जाने से पहले उसने फायर अलार्म चला दिया वर्त्तमान शिक्षक की आत्मा-प्रशंसा को भंग करने के लिए।

बाद में उस भूतपूर्व महिला शिक्षक के तीनो बच्चे (शायद उसी के बच्चे ही थे ) अपनी माँ को खुश करने के लिए स्कूल कैंपस की ज़मीन को टाइम कैप्सूल की तलाश में खोदना शुरू करते हैं। शायद किसी विद्यार्थी ने उनकी माँ के लिए कुछ अच्छा लिखा हो। हालाँकि की ये एक बहुत बड़ा जोखिम/रिस्क था मगर चूँकि माँ के प्यार जैसा कोई …

मेरे बुक क्लब में एक खूबसूरत मौजूदगी

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वो कहते ,हैं, जहाँ चाह वहां राह. सही बात है।

मैं अपने घर पर हूँ (वो घर जो इस दुनिया के किसी भी मकान से ज़्यादा अपना है) माँ-पापा , भाई और बाकी परिवार जनों के साथ समय बिता रही हूँ।  बैंगलोर से दूर जाने में यूँ तो कुछ अफ़सोस रह ही जाते हैं जिनमें मेरा अपना बुक क्लब ना चला पाना एक है। मगर यदि पाठकगण हर जगह मिल सकते हैं तो किताबें भी और मेरे बुक क्लब जैसा साधन भी। यहाँ आने के बाद मैंने अपने भतीजा, भतीजी और बेटे के साथ बुक क्लब चलाना शुरू किया। इन तीनों ने मुझे मेरे ही क्लब को एक नए रूप से एक नए नज़रिये से जारी रखने में मदद की। कहने को तो हम बस चार ही हैं मगर इतने में भी बहुत कुछ रचनात्मक किया जा सकता है।

आज इस महीने का तीसरा सेशन था।  अपने बुक क्लब को अपने घर चलाने में सबसे बड़ा फायदा और सबसे बड़ा मज़ा इसी बात में आता है कि आपके पेरेंट्स  कभी भी आ सकते हैं  और इसका हिस्सा बन सकते हैं। तो आज मेरी माँ अचानक से मेरे क्लब में आ गयीं और संयोग से हम सब आज मस्ती वाला सेशन कर रहे थे - Mind Spa on Monday. हमने ३० मिनट तक बुक्स पढ़े और उसके बाद अगले ३० मिनट तक कलर कर रहे थे। मैं अपने भतीजे के साथ कलर कर…