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Showing posts from 2018

गिटार बेहतर बजाने के ३ तरीके #2

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पिछले पोस्ट में हमने बहुत सुन्दर तरीके से ब्लॉग शुरू करने के बारे में बातें की थीं। और ऐसा करने के लिए मैंने आपको एक नहीं दो नहीं बल्कि तेरह बेहतरीन और सही वजहें भी दीं।  उम्मीद है कि आपने ध्यान दिया होगा और अमल भी किया होगा। 
पढ़िए १३ वजहें क्यों आपको एक ब्लॉग शुरू करना चाहिए 
आज बात करते हैं गिटार के बारे में। पहले हमने पढ़ा गिटार बेहतर बजाने के ३ तरीके #1  (पढ़ने के लिए क्लिक करें) . पहलेपहल तो केवल एक पोस्ट लिखने का विचार था मगर चूँकि गिटार में बेहतर बनने के अनगिनत तरीके हैं , मैंने निश्चय किया कि एक पोस्ट के बदले इसे एक सीरीज में तब्दील कर दिया जाए जिसके हर पोस्ट में गिटार बजाने के 3 तरीके दिए होंगे। 3 पढ़कर कर ख़तम करना काफी आसान है, नहीं?
पहली बात कि मैं कोई प्रोफेशनल गिटारिस्ट नहीं हूँ। मैं इसे अपने गिटार के प्रति प्रेम के लिए बजाती हूँ। तकरीबन तीन साल हो चुके हैं मुझे गिटार बजाते हुए। इस सफर में मैंने कुछ तरीके सीखे और अपनाये हैं जिनसे मेरा प्रदर्शन बेहतर हुआ है। तो मैं जितनी भी युक्तियाँ या टिप्स आपसे यहाँ साझा करूंगी , इत्मीनान रखिये कि वो मेरे अनुभव से प्रेरित हैं और सही हैं। …

१३ वजहें क्यों आपको एक ब्लॉग शुरू करना चाहिए

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आपको पता है जब मेरे रूटीन का पहिया अपनी पटरी से सरक जाता है और रोज़ की दिनचर्या आप-धापी में बदल जाती है तो क्या मुझे लिखने के लिए प्रेरित करता है ? मेरा ब्लॉग, या साफ़ कहूँ तो ब्लोग्स। ब्लॉग वो जगह है जहाँ आप अपनी भावनाओं को व्यक्त कर पाते हैं और साथ ही साथ ये मरहम का भी काम करता है। मैं एक नहीं वरन दो ब्लोग्स लिखती हूँ - पेजेज फ्रॉम माय लाइफ अंग्रेजी में और पेजेज फ्रॉम माय लाइफ इन हिंदी (जिसे आप अभी पढ़ रहे हैं)। 
मगर चलिए पहले बात करते हैं जिसके बारे में हम यहाँ इकठ्ठा हैं - मैं बताउंगी आपको कि आपको क्यों एक ब्लॉग शुरू करना चाहिए और उससे भी ज़्यादा, कैसे। 
१. साझा करने का बेहतरीन जरिया 
जब लोगों को पता चलता है कि मैं ब्लॉग लिखती हूँ तो एक सवाल करीब करीब बिजली की गति से मुझ तक पहुँचता है - आपका ब्लॉग किस बारे में है ?

२०१८ ... सबसे बेहतरीन दिवाली

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कुछ दिनों पहले मेरा बेटा रुआंसा सा होकर मेरे पास आया। मैं रसोई में किसी काम में व्यस्त थी। बेटे ने कहा ,
मम्मा ! हम इंडिया में क्यों नहीं हैं? वहां हम दिवाली कितने मज़े से मना रहे होते। यहाँ हमारे पास करने को कुछ भी नहीं है। आई मिस इंडिया!
अब कुवैत में रहकर भारतीय त्यौहार मनाने की अपनी अलग कहानी है। सबसे पहले तो ये एक पूरी तरह से दूसरा देश है, यहाँ की संस्कृति भारत से कहीं भी मेल नहीं खाती और आखरी मगर बेहद महत्त्वपूर्ण बात कि दिवाली यहाँ पर मनाई ही नहीं जाती। अगर हम अमेरिका, ब्रिटैन यहाँ तक कि दुबई में भी होते तो बात अलग होती। इन देशों में तो दिवाली इतनी धूमधाम से मनाई जाती है जितना कि शायद हमारे भारत में नहीं। 
स्वभाविक तौर पर कुवैत को त्यौहार के रंग में न रंगीन होने के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। दिवाली यहाँ का तो त्यौहार ही नहीं है। मैंने अपने बेटे को समझाया ,
तुम्हें परेशान होने की ज़रुरत नहीं। बस इतना याद रखो  - एक परिवार की तरह हम जहाँ साथ हैं वही खुशियां मनाने के लिए काफी है। 
मेरा ये जवाब उसके दिल को किस गहराई तक छू गया है इसका अंदाजा मुझे तब लगा जब मेरे पति देर शाम ऑफिस से …

ऐ दिल है मुश्किल गिटार कवर + टुटोरिअल

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आते जाते हँसते गाते गिटार कवर + टुटोरिअल

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क्या होगा अगर आप अपने बच्चे के लंच के डिब्बे में चम्मच रखना भूल जाते हैं ?

वो खाने से भरे हुए डिब्बे के साथ घर लौटता है, च्च!
केवल आज ये च्च पल नहीं था। असल में ये अरे नहीं! वाला पल था  सदमे, दुःख और गुस्से से भरा। मैं खुद से नाराज़ थी मगर अपने बच्चे के लिए दुखी। मेरा उसके लंच के डिब्बे में चम्मच रखना भूल जाने का मतलब था कि उसने एक सैंडविच, थोड़े अंगूर और एक संतरा ही  खाया। मेरी भूल की वजह से आज मेरा बेटा भूखा घर आया। 
यूँ तो मैं ऐसी स्थितियों का पहले ही ख्याल रखती हूँ। मैं उसके बैग में हमेशा एक या दो चम्मच अलग से रखती ही हूँ। साफतौर पर, आज जो हुआ वो पहली दफा नहीं था। मैं पहले भी दो - तीन दफे चम्मच रखना भूल चुकी हूँ और उसने किसी तरह हाथ से खाना खाया मगर फिर भी मैं दुखी होने से खुद को रोक न सकी। आज वो चावल और सब्ज़ी हाथ से नहीं खा पाया। 
तो मैंने सबसे पहले उसके बैग में रखा और फिर जल्दी से रसोईघर में जाकर उसके लिए कुछ अच्छा स्वास्थ्यपूर्ण नाश्ता बनाया। 
तो अगर आप पेरेंट्स हैं तो मेरे जैसे पैरेंट से सीख लीजिये। अपने बच्चे के बैग में एक चम्मच और कांटे का एक्स्ट्रा सेट रखें ताकि आपको आज जैसा च्च पल से सामना न पड़े। 
इसी लेख को इंग्लिश में पढ़ें : What happens when yo…

तुझसे नाराज़ नहीं ज़िन्दगी (फिल्म: मासूम) गिटार कवर

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गिटार पर कोई गाना गाकर उसे अपलोड करने में कुछ समय हो गया है।  क्यों? ये वीडियो देखिये और आप स्वतः ही जान जायेंगे। जी हाँ, आपने बिलकुल सही पहचाना। ये एक तरीका है आपको वीडियो देखने पर मजबूर करने का। उम्मीद है कि पसंद आएगा।

मेरा फेसबुक संगीतकार पेज को पसंद यानी Like करें: गिटार गॉर्जियस 

मेरे यूट्यूब चैनल के सदस्य बनें (यानी Subscribe करें): गिटार गॉर्जियस द्वारा तुझसे नाराज़ नहीं ज़िन्दगी 


क्रॉफोर्ड विल्सन डिसूज़ा द्वारा लाइफ मैनेजमेंट विद कलर्स ऑफ़ लाइफ वीकेंड ब्लास्ट (Oct 12th 2018)

गत वीकेंड को मैंने यहाँ एक बहुत ही बढ़िया वर्कशॉप किया जिसकी डिटेल्स नीचे वाली लिंक में दिए गए हैं। चूँकि पोस्ट बहुत लम्बा है और समय की थोड़ी कमी है, इसीलिए हिंदी में अनुवाद ज़रा मुश्किल है।  किसी भी कष्ट के लिए खेद है।

पढ़ें: Life Management with Colours of Light Weekend blast #1 (Oct 12th 2018)

Life Management with Colours of Life Weekend blast #2 (Oct 13th 2018)

इन पोस्ट में तसवीरें और ऐसी बहुत सारी बातें हैं जो मुझे और आपको एक बेहतर ज़िन्दगी जीने के लिए प्रेरित करेंगी। अगर आपको अच्छी लगे तो अपनी राय ज़रूर व्यक्त करें नीचे कमेंट बॉक्स में।

धन्यवाद !

गिटार बेहतर बजाने के ३ तरीके #1

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सब पहले एक अच्छी खबर बताती हूँ। मेरा हाल ही का ब्लॉगपोस्ट इंडियंस इन कुवैत यानी आई. आई. के. (IIK) के पहले पृष्ठ पर छपा है। आई. आई. के. कुवैत में भारतियों की सबसे बड़ी कम्युनिटी है। मैं तहेदिल से शुक्रगुज़ार हूँ इस सुन्दर अवसर के लिए। पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें:
इंडियंस इन कुवैत में प्रियंका बरनवाल का आर्टिकल 
चलिए अब बात करते हैं उस विषय की जिसके लिए हम यहाँ पर हैं। मैंने गाने के कवर्स और टुटोरिअल्स शेयर किये हैं। अपनी गिटार जर्नी यानी यात्रा के बारे में भी लिखा है मगर कोई ऐसा लेख नहीं लिखा जिसमें मैंने गिटार बेहतर बजाने के तरीके बताये हो। 

मगर चलिए, इस समस्या को यहीं विराम देते हैं। मैं आज आपको गिटार पर बेहतर बनने के ३ बेहतरीन तरीके बताने जा रही हूँ। मैं स्वयं ३ सालों से गिटार बजा रही हूँ और अब लगता है कि कुछ सीखा सकती हूँ। इस तरीकों ने मुझे समय के साथ बेहतर बनाया है। 
१. ट्यूनिंग 
अगर आपको सर्दी खांसी हो तो क्या आप गा सकते हैं? नहीं? मुझे भी कुछ ऐसा ही लगा। 
अगर आप गिटार को ट्यून नहीं करेंगे तो इसकी आवाज़ सही नहीं आएगी। भारत में अपने गिटार क्लास में सबसे पहले मैंने यही बात सीखी थी। गिट…

क्रॉफोर्ड विल्सन डिसूज़ा द्वारा आयोजित सेमिनार Life Management with Colours of Life

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बीते शुक्रवार को हमने मौर्य कला परिसर द्वारा आयोजित ५वां दिनकर दिवस मनाया। वह दिन काफी यादगार रहा। 
पिछले सप्ताहांत की ही तरह इस सप्ताहांत भी मैं कुछ रोचक करना चाह रही थी। पता चला कि गुरुकुल, जो मेरे घर के बेहद नज़दीक है, जीवन प्रबंधन यानी लाइफ मैनेजमेंट पर एक सेमिनार आयोजित कर रहा है। अब क्या कहूँ? समस्या का समाधान चुटकी में हो गया। 
सेमिनार का नाम Free Seminar on Life Management with Colours of Life by Crawford Wilson D'Souza रखा गया था। इसका उल्लेख जैसे दिया गया था वैसा ही देती हूँ:

भारतीय दूतावास में मौर्य कला परिसर द्वारा आयोजित दिनकर दिवस 2018

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अभी हाल ही में हमने मौर्य कला परिसर और भारतीय दूतावास (Indian Embassy), कुवैत के संयोजन से आयोजित ५ वां दिनकर अवार्ड्स समारोह और हिंदी दिवस एक साथ गत शुक्रवार सितम्बर २८ २०१८ को मनाया। यह दिन हमारे राष्ट्रकवि श्री रामधारी सिंह दिनकर जी के जन्मदिन (सितम्बर २३) के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।  हिंदी दिवस सामान्यतौर पर सितम्बर १४ को मनाया जाता है। 
भारतीय दूतावास, कुवैत के बारे में अधिक जानकारी के लिए क्लिक करें 
मौर्य कला परिसर,कुवैत के बारे में अधिक जानकारी के लिए क्लिक करें 
तीन बातें जानने योग्य हैं:
१. मैं एक भारतीय हूँ  २. मेरी मातृभाषा हिंदी है, और  ३. मैं कुवैत में रहती हूँ यानी भारत से बहुत दूर 
कहने की ज़रुरत नहीं मुझे इस समारोह में जाने की कितनी उत्सुकता रही होगी। हम मौर्य कला का हिस्सा हैं और उनके कुछ कार्यक्रमों में पहले भी गए हैं। मगर जब बात हिंदी दिवस की हो, एक दिन हमारी मातृभाषा को समर्पित, तब तो इसे छोड़ पाना संभव ही नहीं था। आखिरकार, कौन अपनी मातृभाषा की मधुरता का आनंद नहीं लेना चाहेगा ?

ज़िन्दगी एक निरंतर सीख है - मिस लीडिआ कत्तान, मिरर हाउस कुवैत की निर्माता, के साथ एक साक्षात्कार

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ऐसा विरले ही होता है मगर जब भी होता है ज़िन्दगी भर के लिए यादग़ार होता है। 
तकरीबन दो हफ़्तों पहले मैं मिस लीडिआ अल कत्तान से मिली। मिस लीडिआ कत्तान मिरर हाउस या आइना घर, कुवैत की निर्माता और मालिक हैं। हम घर देखने पहुंचे मगर क्या देखने को मिलेगा, इसकी ज़्यादा कोई कल्पना नहीं  थी मगर एक बार जब घर की चारदीवारी के बाहर खड़े हुए तो जो दिखा वो आगे की उम्मीदों का बस एक नमूना था। घर के अंदर की दीवारें शीशे की चिड़ियों, ग्रहों, तमाम कहानियों इत्यादि से सजे हुए हैं। चाहे फ़र्श हो, दीवारें, छतें या सीढ़ी, मिरर हाउस, कुवैत रचनात्मकता का अनुपम उदाहरण है मगर उससे भी बड़े अचरज  से सामना तब हुआ जब टूर के अंत में मैंने मिस लीडिआ का इंटरव्यू यानी साक्षात्कार लिया। महसूस हुआ कि मिस लीडिआ का व्यक्तित्व अपने घर से भी महान है। 
पढ़ें एक शाम मिरर हाउस, कुवैत में 


मेरी माँ, मैं और शाम की चाय

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हर पल में खूबसूरती छिपी है। बस हमें उसे ढूंढने की ज़रुरत है। 
जैसे चाय का समय ले लीजिये। ये दिन का बहुत ही साधारण सा समय है। पैन को स्टोव पर रखिये, सामग्री मिलाइये, पकाइये, छानिये  और मज़े लीजिये। इससे भी बेहतर, जब कोई और ये सारा काम करता है और फिर भी आपको एक बढ़िया चाय पीने को मिल जाती है। लेकिन जैसा मैंने अभी कहा, हर पल में खूबसूरती है. बस आपको देखने की ज़रुरत है। मेरे लिए चाय का समय वास्तव में दिन के सबसे ख़ास पलों में आता है।

एक शाम मिरर हाउस, कुवैत में

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नोट:मिरर हाउस के बारे में जानने के लिए इसके नाम पर कहीं भी क्लिक कीजिये।  


हम बीते शुक्रवार की शाम को मिरर हाउस गए। कुवैत में बाकी पर्यटक स्थानों से अलग, आपको यहाँ पर आने के लिए अपॉइंटमेंट यानी एक नियत समय लेना होगा, क्योंकि मिरर हाउस मिस लीडिआ द्वारा निर्मित और संचालित है और ये उनका अपना घर है। 
वहां जाने के पहले मेरी अपनी कल्पनाएं थीं।

हिंदी दिवस स्पेशल: मायापुरी, मेरा पहला उपन्यास

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१४ सितम्बर देश भर में हिंदी दिवस के तौर पर मनाया जाता है। चूँकि हिंदी मेरी मातृभाषा है, सोचा कि आज कुछ ख़ास और अलग शेयर करना चाहिए। थोड़ा सोच-विचार करने पर, यादों की गहराईयों को टटोलने पर एक ऐतिहासिक पल हाथ आया - मायापुरी
स्कूल के दिनों की पुस्तक नहीं बल्कि मेरे जीवन का  पहला उपन्यासहै। 'मायापुरी' मशहूर लेखिका शिवानी द्वारा रचित है। मैं शायद चौदह या पंद्रह साल की रही हूँगी जब मैंने ये पढ़ी थी। मुझे ठीक ठीक याद नहीं कि किसने पढ़ने को कहा था मगर जिसने भी मुझे ये किताब दी थी मैं तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ। मायापुरी मेरी ज़िन्दगी का पहला उपन्यास है और आज भी मेरे दिल के उतने ही क़रीब है जितना उस दिन था जिस दिन मैंने इसे पढ़कर बंद किया था। शोभा और सतीश की कहानी ने मेरा अंतर्मन छू लिया था। 

अनिश्चितता

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आज सुबह &Prive (एंड प्री-वे) पर एक मूवी आ रही थी। ये चैनल उन लोगों के लिए है जो दूसरी साइड या other side महसूस करते हैं। इस चैनल का पंच लाइन ही है - For those who feel the other side. सच कहूँ तो मुझे  कोई दूसरा साइड दिखाई तो नहीं देता मगर हाँ ! ये चैनल मैं अक्सर दूसरा साइड महसूस करने के लिए ज़रूर लगाती हूँ।  इसपर अच्छी फिल्में आती हैं। 
खुद को मना करने के बावजूद मैं अपने नाश्ते की प्लेट के साथ देखने बैठ गयी। मैं असल में कोई अच्छी मूवी देखने के उद्देश्य से बैठी थी। पता चला कि एक अच्छी मूवी आ भी रही है और बस १० मिनट पहले ही शुरू हुई है। 
मूवी का नाम है - द लवर्स। मूवी की जानकारी टीवी पर संक्षिप्त रूप में दी होती है। वैसे तो मैं रोमांटिक मूवीज देखना पसंद नहीं करती मगर इस मूवी की जानकारी कौतुहल पैदा करने वाली ज़रूर थी।

कैसे सम्हालें दो रोज़गार एक साथ

मैं एक लेखिका और संगीतकार हूँ।  लेखन और संगीत मेरे जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। अगर लिखने से प्यार न होता तो आज मैं अपना नाम किताबों पर ना देख पाती और अगर गिटार के प्रति मेरा अनुराग ना होता तो संगीत में आज इतनी रूचि नहीं होती। और ये दोनों रोज़गार एक साथ कर पाने के लिए मैं बहुत आभारी हूँ। 
जहाँ दोनों कर पाना बहुत अद्भुत है, अनुभव और ज्ञान से ओतप्रोत है, सिक्के का दूसरा पहलु ये भी है कि दोनों एक साथ करना ख़ुशी से ज़्यादा तनाव से भरा है। मैं अक्सर सोच में पड़ जाती हूँ कि दोनों काम एक साथ कैसे करूँ? दोनों ही विस्तृत हैं, सितारों से भरे आसमान की तरह या एक माँ के ह्रदय जैसा। कोई थाह नहीं मगर बहुत सारी पेचीदगियों से भरा हुआ। 
फिर भी मैं करती हूँ मगर उससे भी ज़्यादा महत्त्वपूर्ण, सफल रहती हूँ। कैसे? चलिए, आज बात करते हैं उन तरीकों की जिन्हे अपना कर मैं दोनों काम एक साथ कर पाती हूँ जो शायद आपके लिए भी मददगार हो।  ------------------------------------
#१ विभाजन 
सोच से भी कहीं ज़्यादा मेहनत आपको दोनों काम करते समय डालनी है। समय का उचित विभाजन दिन को व्यवस्थित करने की सबसे महत्त्वपूर्ण चाबी है। 
मैं सामा…

मेरे जीवन की नयी त्रासदी

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बहुत समय बाद मैंने अपना गिटार  बजाया। कह नहीं सकती कि कितना खूबसूरत महसूस हुआ। ये छोटा सा वीडियो कल शाम का है।

कैमिनो आइलैंड पर एक छोटी मनोरंजक यात्रा

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अभी दो दिन पहले मैं कैमिनो आइलैंड से लौट कर आयी हूँ। कुछ ही दिनों की यात्रा थी मगर मुझे बहुत अच्छा लगा। 
वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि कैमिनो आइलैंड प्रसिद्ध लेखक जॉन ग्रीषम की लिखी एक किताब है। उम्मीद है उनका उपनाम हिंदी में ऐसे ही लिखा जाता है ना कि ग्रीशम या ग्रिशम। अगर मैं उनके नए नाम के मुताबिक  जाऊं जो मैंने उन्हें इस किताब को ख़तम करने के बाद दिया है तो वो लेपर्ड ग्रीषम होंगे। क्यों, अभी जल्द ही पता चल जायेगा आपको।

दस लोग. दस सीख. एक सवाल. - टीचर्स डे स्पेशल

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हम अपने गुरुओं का सम्मान करते हैं और जब एक दिन उन्हें याद करने का अच्छा बहाना मिल जाता है तो उस दिन को हम टीचर्स डे कहते हैं।

भारत में टीचर्स डे सितम्बर ५ को मनाते हैं। अलग - अलग देशों में ये दिन अलग तिथियों पर मनाया जाता है। मलेशिया में टीचर्स डे ५ मई को मनाते हैं। न्यूज़ीलैण्ड में इसे अक्टूबर २९ को मनाते हैं। जर्मनी, यू. ए. ई. और ब्रिटैन में ५ अक्टूबर को। ऑस्ट्रेलिया में जहाँ ये दिन ओक्टोबर के आखरी शुक्रवार को मनाते हैं वहीँ अमेरिका में इसे मई के पहले पूरे हफ्ते (यानी सात दिन लगातार) Teacher's Appreciation Week (अध्यापकगण की सराहना) के दौरान मनाते हैं।

पूरी  लिस्ट के लिए यहाँ क्लिक करें: टीचर्स डे किस देश में कब 

देश, कारण और मनाने की समयसीमा चाहे जो भी हो, इन सब में एक शिक्षक सार्वजनिक (common) है: समय। समय से बड़ा कोई शिक्षक नहीं और शायद इसी बात ने कल एक नए विचार को जन्म दिया। हर साल की तरह अपने गुरुओं और माता-पिता को धन्यवाद देने के बजाय इस बार मैंने दस लोगों से एक सवाल करने का सोचा। बहुत उम्मीद थी कि उनके जवाब भिन्न होंगे। इसीलिए , दस सीख। कीमती। आज़माया हुआ। और अंततः साझा किय…

चलिए प्रार्थना करें हमें नापसंद करने वालों के लिए

मान लीजिये आपके घर में एक छोटा बच्चा है जिसने अभी - अभी रेंगना सीखा है। आपको मानने की भी ज़रुरत नहीं अगर आपके पास पहले से ही एक है। अब, उस बच्चे ने अभी अभी चलना सीखा है और ये उसके अब तक की छोटी सी ज़िन्दगी का सबसे महानतम कार्य है। पहले वह जहाँ दिन भर एक जगह बैठा रहता था, अब वह हिल सकता है, चीज़ों को खुद से छू सकता है।  ये सब करना उसके लिए किसी विश्व भ्रमण पर जाने से कम नहीं है। घर, आखिरकार, एक बच्चे के लिए पूरा विश्व है। 
अब ऐसे में होने वाली घटनाओं का अनुमान लगा पाना आसान है कि जब वो सुबह उठता होगा या उससे भी बुरा... देर रात को। वो कमरे में जाता है, सजावट/प्रसाधन की सारी चीज़ें  उलट-पलट कर देता है। आप जल्दी से कमरे में जाते हैं और अभी ठीक कर ही रहे होते हैं कि वो रसोई में घुस जाता है और दराज़ें खोलना शुरू कर देता है। चम्मच, कांटें, गिलासें, थालियां, भगोने इत्यादि फ़र्श पर धड़ाम से गिरने लगते हैं। आप कमरे में तेल की शीशी का ढक्कन लगाना छोड़ रसोई में भागते हैं मगर जनाब तो कब का इस जगह को अलविदा कह चुके हैं। अब वो छोटे से महाशय बैठक कक्ष यानी लिविंग रूम में टी.वी. के पास खड़े हैं जिसका

क्या महिलाएं पुरुषों से कमज़ोर हैं? - जन्माष्टमी स्पेशल लेख

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मैं बैठी थी अपने गिटार का अभ्यास करने मगर सोचा कि पहले जन्माष्टमी की शुभकामनाएं अपने परिवारजनों, मित्रों और पाठकों को दे दी जाएं।

जन्माष्टमी श्री कृष्ण (हिन्दू देवता) के जन्मदिन का प्रतीक है। भारत में हर साल इस दिन को कृष्ण की शरारतों और मासूमियत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। जन्माष्टमी के बारे में जानने के लिए यहाँ क्लिक करें: जन्माष्टमी हिंदी में

और मैं एक बातचीत का महत्त्वपूर्ण हिस्सा बताना चाहूंगी जो हाल ही में हुआ है।


मेरे पति ने हमारे बेटे को उसकी अकादमी से लिया और दोनों घर की तरफ चले। रास्ते भर दोनों ने बहुत बातें की। ज़ाहिर तौर  पर, हमारे बेटे को किसी बच्चे ने अकादमी में थोड़ा परेशान कर दिया था उस दिन। बेटा उदास था, थोड़ा खिन्न भी।  उसकी कोई गलती नहीं थी तो थोड़ा नाराज़ भी था।

ह्रदय से दार्शनिक मेरे पति उसे समझाने लगे और वही बात दोहराई जो हम अक्सर अपनी बात सिद्ध करने के लिए साधारण तौर पर कह देते हैं ,

"बी ए मैन !" यानी मर्द बनो!

बेटा चुप हो गया, सोचने लगा और फिर बोला,

"आप हमेशा मर्द बनने को ही क्यों कहते हैं, पापा ? क्या औरतें मज़बूत नहीं होतीं?"

आप शायद उ…

मोबाइल फ़ोन्स को तीन गुना बेहतर कैसे इस्तेमाल करें ?

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मैं जब भी किसी प्रसिद्ध व्यक्ति यानी सेलिब्रिटी का इंटरव्यू पढ़ती हूँ to एक सवाल उनसे अक्सर पूछा जाता है :
वो कौन सी तीन चीज़ें हैं जिनके बिना आप घर से बाहर नहीं जाते ?
उन सभी जवाबों में मोबाइल फ़ोन का ज़िक्र ज़रूर होता है।  और हो भी क्यों न ? अगर मुझसे भी यह सवाल किया जाए तो मैं भी कहूँगी  - घर की चाबियाँ, पैसे और मोबाइल। 
क्या आप जानते हैं आज तकरीबन पांच बिलियन लोग मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल करते हैं ? ये तकनीकी दुनिया का महानतम रिकॉर्ड है। या, शायद आज हमारी पृथ्वी पर इंसानों से ज़्यादा मोबाइल फ़ोन्स हैं। 
अब तो मोबाइल फ़ोन्स के बिना ज़िन्दगी का अनुमान लगाना असंभव सा है। जापान में क़रीब 90 प्रतिशत मोबाइल फ़ोन्स वाटर-प्रूफ यानी जल-रोधक बनाये जाते हैं। वहां की युवा नहाते समय भी मोबाइल में व्यस्त रहते हैं। है न आश्चर्य की बात ?

अमनदीप मित्तल की प्रोत्साहना

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सबसे पहले सबसे अहम बात। नीचे दिया हुआ है मेरी नयी किताब  - The Shadow of Darkness - के  बारे में लिखा गया एक मत/राय/रिव्यु।

मेरी किताब अमनदीप मित्तल के ब्लॉग पर बुक स्पॉटलाइट में स्थान दिया गया है। 
Confessions of a Readaholic. वहां जाने के लिए नाम पर क्लिक करें। क्योंकि दो दिन बाद आपको ये नहीं मिलेगा। ये स्पॉटलाइट एक हफ्ते के लिए ही है। 
अमनदीप के शब्द बहुत ही प्रोत्साहित करने वाले हैं। शायद इसलिए भी कि उन्होंने किताब को पढ़ने के बाद अपने चुनिंदा और बेहतरीन विचारों को शेयर करने की कोशिश की। और मैं इस बात की इज़्ज़त करती हूँ और दिल से की सराहना करना चाहूंगी। 
बहुत बहुत धन्यवाद उनका ! और हाँ , अब मैं और भी ज़्यादा मेहनत कर्रूँगी। 

ये सिर्फ एक लड़की का नहीं, दोनों का साझा काम है।

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पिछले हफ्ते मैं अपनी सहेली से फ़ोन पर बात करने में मशग़ूल थी। मुझे याद नहीं कब हम दोनों की बातों का सिलसिला इस तरफ घूम गया मगर इतना ज़रूर याद है कि हम काम बांटने के बारे में बात कर रहे थे।  इससे पहले मैं आगे कुछ कहूँ, मेरा निवेदन है कि आप पहले ये वीडियो देखें : 


यह वीडियो बहुत सशक्त और प्रभावी वीडिओज़ में से एक है। 
तो वापस आते हैं उस फ़ोन कॉल पर। मेरी सहेली ने अपनी रोज़मर्रा की ज़िन्दगी से एक चुना हुआ पल मुझे बताया।
"हम रात का खाना (डिनर) कर चुके थे। मैं बचे हुए खाने के बर्तन रसोई में हटा  रही थी। वापस आकर जब मैं जूठी प्लेट्स को रसोई में धोने के लिए ले जाने लगी तो मेरे पति आ गए और मुझसे वो प्लेट्स लेने लगे। अमेरिका में घर के काम करने के लिए कोई नहीं मिलता। सब हमें खुद ही करना होता है। जब मेरे पति प्लेट्स लेने लगे तो मैंने मना करते हुए कहा कि कोई बात नहीं। मैं कर लूंगी। जिसके जवाब में उन्होंने ये कहा :

चलिए बात करते हैं मेरी आलोचना के विषय में

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जब लोग आपके द्वारा किये गए किसी काम की आलोचना करते हैं तो उसे सुनना आसान नहीं होता।  सबका अपना तरीका होता है आलोचना से जूझने का। मगर किसी भी आलोचना से निपटने का एक बहुत अच्छा रास्ता है : मुस्कुराते रहिये और जो भी सकारात्मक बात मिल सके, अपना लीजिये। 
लेखिका होने पर मुझे कई बार आलोचना का सामना करना पड़ता है। जब मेरी नयी किताब/नावेल - द शैडो ऑफ़ डार्कनेस - आयी तो स्वभावतः मुझे बेहद ख़ुशी हुई। जब भी अपनी किताबों को घर में देखती हूँ तो बहुत प्रसन्नता  है। 
कुछ समीक्षकों ने मेरी नयी बुक की समीक्षा की है। जहाँ उनमें से कुछ ने अपनी उदारता दिखाई  और किताब के मज़बूत पक्षों पर ज़्यादा ध्यान दिया, वहीँ कुछ ने नकारात्मक पक्ष पर चश्मा साध लिया। चिंता ना कीजिये ! मैं दोनों तरह की आलोचनाओं  का सम्मान करती हूँ। 

और कुछ ने तो अपनी समीक्षा में ऐसी बातें लिखी जो सच ही नहीं हैं। अच्छी और बुरी समीक्षा का स्वागत मैं करती हूँ मगर गलत आलोचना मुझे ज़रा पसंद नहीं आती। क्योंकि वो गलत नजरिया सिर्फ मैं ही नहीं वरन कई लोग पढ़ रहे हैं।  जिसकी वजह से मेरी इतनी मेहनत से लिखी गयी किताब पर गलत असर पड़ेगा। 
तो आज मैं हिम्मत की …

पेरेंट्स की शादी की वर्षगांठ पर छोटी सी कविता

कर्तव्यों की सीढ़ी चढ़ते - चढ़ते
जाने कहाँ छोड़ आये हम खुशियों की ज़मीन
मुस्कुराये हुए तो जाने एक ज़माना हो गया
और लोग कहते हैं वजह भी हैं हम हीं !

रिश्तों के भंवर में घूमते घूमते
सीधी सी ज़िन्दगी भी उलझ गयी
चले थे ज़िम्मेदारियों की बागडोर सम्हालने
पर अपने ही थोड़े बदल गए;

अब नहीं होता,  बस बहुत हो गया !
सहन नहीं होता, बहुत हो गया !
एक पल को ही सही पर कहीं छुप जाते
माँ -बाप के साये में एक बार बच्चे फिर बन जाते !
वही कोमल बूढ़ी उँगलियों को पकडे
बचपन की गलियों में दौड़ आते
थोड़ा सा गिरते, थोड़ा सम्हल आते;

लौटा नहीं सकते समय के चक्र को
तो आगे ही देखना है, मेरे साथी!
सैंतीस साल बीत गए तुम्हारे संग
तुम ही हो मेरी जीवनसाथी ;

ग़म न करो , मेरे हमसफ़र !
रिश्तों के इस भंवर में
ज़िम्मेदारियों के इस समंदर में
मैं हूँ आपका हाथ पकडे
खड़ी आपके पीछे हिम्मत बन के !

साथ जो ग़र है एक दुसरे का
मुश्किल से मुश्किल दौर भी गुज़र जाएगा;
चलो आज एक बार फिर जी लें
थोड़ा हंस लें, थोड़ा मुस्कुरा लें
कल से फिर वही ज़िन्दगी में चलना है
साथ जो हम हैं तो फिर क्या डरना है !

P.S. यह कविता मैंने अपने माँ - पापा की शादी की वर्षगांठ पर बनायी है। उन्हें बहुत पसंद आया ! कुछ ऐ…

क्या प्यार ही सब कुछ है ?

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रिश्ता चाहे कोई भी हो , प्रेम, स्नेह, और सान्निद्ध्य का उस पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। हमारे प्रियजन का प्यार और आशीर्वाद ही वो कड़ी है जो हमें सदैव आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। कुछ समय पहले पढ़ी गयी कुछ खूबसूरत पंक्तियाँ याद आ गयीं।  
हमने पूछा 'उम्र' और 'ज़िंदग़ी में फरक क्या है ? बहुत सुन्दर जवाब मिला- जो अपनों के बिना बीती वो 'उम्र' और जो अपनों के साथ बीती वो 'ज़िंदग़ी'। 

मगर क्या प्यार ही सब कुछ होता है रिश्तों में ? क्या प्यार ही वो मापदंड है जिसकी अधिकाधिक इकाई रिश्तों की मधुरता का द्योतक है ? यूँ तो सोचने में लगता है कि, हाँ ! प्यार ही तो सब कुछ है। प्रेम और स्नेह ही तो वो भावनाएं हैं जो इंसान को पूरा करती हैं ; जो उन्हें पास लाती हैं ; जिनसे जीवन में हर कठिनाई से जूझने का सम्बल मिलता है। अगर प्रेम नहीं तो कुछ भी नहीं ! ऐसा ही कुछ लगता है ना ? तो चलिए ! आपको सोच के सागर में थोड़ी और गहराई तक ले जाते हैं।  ऐसी गहराई जहाँ सिर्फ सोच के चमकते मोती ही नहीं वरन जीवन के कुछ छोटे - बड़े अनुभवों का भी एक छोटा सा इंद्रधनुष है।