Posts

Showing posts from 2018

खुद के नाम एक ख़त (2018)

Image
प्यारी तुम,
एक सलाह। जब भी खुद को एक ख़त लिखने बैठो तो इतना ज़रूर ध्यान रखो कि तुम्हारा कोई मनपसंद टीवी सीरियल ना आ रहा हो। जैसे फ्रेंड्स या द बिग बैंग थ्योरी। ऐसा  करना ठीक नहीं है। 
खैर, चलो आगे बढ़ते हैं। 
आज २०१८ का आखरी दिन है, दिसंबर ३१ और चूँकि तुमने पूरे साल यानी ३६४ दिन अपने लिए कोई खत नहीं लिखा है तो अब ऐसा करना शायद थोड़ा भावुकता से भरा या सिली सा लगे। मगर फिर किसी भी काम को पहली बार करने में एक बात है - ये ख़ास बन जाता है !तो इसीलिए इस खत को २०१८ के अंत में किये गए तमाम ख़ास चीज़ों में से एक समझो।


२०१८.  ऐसा साल जिसमें खुशियों से ज़्यादा ग़म, चढ़ाव से ज़्यादा उतार और आशा से ज़्यादा निराशा देखा। मगर क्या ये इसे कम ख़ास बनाते हैं?

छठा दिन - 'मस्तीभरी छुट्टी!' सीरीज

Image
'मस्तीभरी छुट्टी!' सीरीज में अगला है हमारा छठा दिन। पांचवें दिन के लिए यहाँ क्लिक करें। 
छठा दिन 
वीकेंड पालक झपकते ही बीत गया। हमने बहुत सारे काम किये। मैंने शुक्रवार को एक के बाद एक दो इवेंट्स में भाग लिया। शनिवार कुछ ज़रूरी शॉपिंग में निकल गया। एक अभिभावक होने के नाते मुझे ऐसा महसूस होता है कि बच्चों को शॉपिंग पर ज़रूर ले जाना चाहिए। ये एक अच्छा बहाना है उनमें धैर्य और अनुशासन लाने का। मगर हाँ! ज़रूरी शॉपिंग की बात हो रही है यहाँ पर। 
जब पतिदेव ऑफिस के लिए निकल गए तो मैं  अपने बेटे के साथ बिस्तर में घुस कर बातें करने लगी। हमने कुछ देर बातें की और उसी में किसी पड़ाव पर उसने एक बहुत अच्छा सवाल पूछा -

बरन पुंज में मेरी किताब की समीक्षा और पहला हिंदी साक्षात्कार

Image
मुझे यह बताते हुए ख़ुशी का अनुभव हो रहा है कि मेरा पहला हिंदी इंटरव्यू और साथ ही साथ मेरी किताब - इट्स नेवर टू लेट...  - की समीक्षा यानी रिव्यु भारत की जानी मानी हिंदी पत्रिका 'बरन पुंज'  के दिसम्बर २०१८ में प्रकाशित हुई है।




इसी लेख को मेरे अंग्रेजी ब्लॉग पर देखें: My book review+interview featured in Baran Punj

पांचवां दिन - 'मस्तीभरी छुट्टी!' सीरीज

Image
आज हमारे 'मस्तीभरी छुट्टी!' सीरीज का पांचवां दिन है और मुझे कहना पड़ेगा कि ये कुछ अलग तरह गुज़रा, उम्मीद से परे। 
आप चौथा दिन के बारे में पढ़ सकते हैं जहाँ से आपको पिछले तीन दिनों के बारे  भी पता चल जायेगा। 
पांचवां दिन 
 आज सुबह मेरे बेटे के वर्कशॉप, जिसे उसने कल ही ज्वाइन किया है, का दूसरा और आखरी दिन था। जब तक वो वर्कशॉप में व्यस्त रहा तब तक मैं घर पर तनावरहित होने की कोशिश मैं लगी रही।  आजकल के समय में यूँ लगता है कि तनावयुक्त रहना तनावमुक्त रहने से कहीं ज़्यादा आसान है। चिंतारहित रहना तो अब दूभर सा हो गया है।

चौथा दिन - 'मस्तीभरी छुट्टी!' सीरीज

Image
आज हमारे 'मस्तीभरी छुट्टी!' सीरीज का चौथा दिन है। अगर आप पहली बार इसे पढ़ रहे हैं तो मैं आपको ये बता दूँ कि बेटे की इन छुट्टियों को कुछ और ख़ास बनाने के लिए मैं सजग हूँ। आप पहला दिन में विस्तार से पढ़ सकते हैं। दूसरा दिन और तीसरा दिन भी पढ़ें। 
तीसरे दिन में हालाँकि आपको मेरा एकदम नया गिटार कवर भी मिलेगा। मैंने इसमें ढोलक की भी झलक दी है। ऐसा पहली बार हुआ है कि मैंने अपने किसी भी गिटार कवर में ढोलक का समन्वय किया हो। 
चौथा दिन 
छुट्टियां सिर्फ मस्ती के लिए ही नहीं वरन इनमें कुछ न कुछ नया भी सीखना चाहिए।

तीसरा दिन - 'मस्तीभरी छुट्टी! सीरीज + 'तेरे जैसा यार कहाँ' गिटार कवर+टुटोरिअल

Image
सबसे पहले, क्रिसमस की शुभकामनाएं! उम्मीद है कि आज का दिन स्वजनों के साथ अच्छा बीत रहा होगा और आपके सांता के साथ साथ आप भी किसी के सांता बनकर ढेर सारी खुशियां लुटा रहे होंगे। 
मैंने दुसरे दिन का पोस्ट पिछली रात काफी देर में ख़तम किया। करीब १२:५५ हो रहे थे जब मैंने पब्लिश किया। जिस तरह से आजकल के दिन गुज़र रहे हैं, सांस लेना अगर एक अनैच्छिक कार्य न होता तो शायद मैं इसे लेना भी भूल जाती। 
खैर, यह हमारे "मस्तीभरी छुट्टी!' सीरीज का तीसरा दिन है। चलिए बात करते हैं कि कैसे मैं अपने बेटे की छुट्टियां ख़ास बनाने में मशगूल हूँ। 
दुसरे दिन और पहले दिन के बारे में पढ़ें। 
तीसरा दिन 

दूसरा दिन - 'मस्तीभरी छुट्टी!' सीरीज

Image
यह हमारी मस्तीभरी छुट्टी! सीरीज का दूसरा दिन है। नहीं समझे ? पहला दिन - मस्तीभरी छुट्टी! को पढ़ेंगे तो जान जायेंगे।
------------------------------------------- दूसरा दिन 
आज मेरे बेटे की छुट्टी का दूसरा दिन है और आज हमने कुछ ख़ास किया। सबसे पहले तो मैंने नाश्ते में पैनकेक बनाया। याद है कैसे हमने पहले दिन के पोस्ट में कुछ नयी रेसिपीज बनाने की बात की थी? पैनकेक उनमें से एक था।

पहला दिन - मस्तीभरी छुटटी! सीरीज

Image
क्या आपने IES Bhavans में मेरा दिया हुआ चाइल्ड एब्यूज सेशंस पर लेख पढ़ा? नहीं? तो यहाँ पढ़ें।

-------------------------------------

क्या है 'मस्तीभरी छुटटी!' सीरीज 
यह क्रिसमस और नए साल की छुट्टियों का समय है। मेरे बेटे की छुट्टियां शुरू हो गयी हैं और अब पूरे दो हफ्ते तक रहेंगी। 
कुवैत में रहने के अपने अलग कमज़ोरियाँ हैं। इंडिया में हम एक सोसाइटी में रहते थे जहाँ बच्चों का अपना ही एक ग्रुप था। मुझे अक्सर दूसरों को फ़ोन करके अपने ही बेटे की खोज खबर लेनी पड़ती थी। लेकिन यहाँ  का तो माजरा ही कुछ और है। यहाँ न तो कोई सोसाइटी है न ही बच्चों का ग्रुप। मेरा बेटा कितनी ही बार बोर हो जाता है और एक माँ होने के नाते मुझे खल जाता है।

संगीत को प्रेरणा बनाइये

Image
ज्ञान के किसी एक ही पड़ाव पर न रुके रहें। संगीत को अपनी प्रेरणा बनाइये और कल से भी बेहतर बनिए। 
~ गिटार गॉर्जियस

IES Bhavans कुवैत में चाइल्ड एब्यूज पर सेशंस

Image
पिछले गुरुवार यानी तेरह दिसंबर को मैंने चाइल्ड एब्यूज पर एक नहीं दो नहीं बल्कि तीन सेशंस दिए और वो भी एक के बाद एक। आप अचंभित हो गए होंगे ये सोचकर कि क्यों? आखिर क्यों?
चाइल्ड एब्यूज एक ऐसा मुद्दा है जिसके बारे में हर एक बच्चे को जानकारी होनी चाहिए। साथ ही साथ भवंस एक बहुत बड़ा स्कूल है और वो चाहते थे कि मैं एक क्लास से  ज़्यादा के लिए अपना सेशन करूँ। मैं मान गयी और इसीलिए मैंने तीन सेशन दिए - पहला प्राइमरी सेक्शन (३ और ४) और दूसरा सेकेंडरी सेक्शंस (५, ६, और ७). 

पिछले रविवार से मुझे गले का इन्फेक्शन हुआ था। बाकी सारे लक्षणों में कमज़ोरी सबसे ज़्यादा थी।  लेकिन  पिछले महीने से ही तय किये गए थे और मैं इसे स्थगित नहीं करना चाहती थी। मैंने अपनी दवाइयाँ निगलीं मगर ये शायद मेरी इच्छा शक्ति और मेरे परिवार का आशीर्वाद था जिसने मुझे चार घंटों तक बखूबी खड़ा रखा वरना घर पर तो मैं सिर्फ आराम ही कर रही थी। मेरे पति भी मेरे साथ गए थे और पूरा समय मेरे साथ रहे। 
खैर, गनीमत रही कि मैं सब कुछ ठीक से कर पायी। बड़े से हॉल में बच्चों को देख कर मुझमे पर्याप्त मात्रा में हिम्मत और प्रेरणा का संचार हुआ।  वो सभी …

पापा कहते हैं + गिटार के साथ मेरा पहला स्टेज परफॉरमेंस

Image
मेरे यूट्यूब पर देखें:

पापा कहते हैं गिटार कवर 

गिटार के साथ मेरा पहला स्टेज परफॉरमेंस 

मेरा फेसबुक म्यूजिशियन पेज लाइक करें : गिटार गॉर्जियस

समय की कमी की वजह से मैं पिछले पोस्ट अपने अंग्रेजी ब्लॉग से यहाँ हिंदी में अनुवाद नहीं कर पायी हूँ। खेद है मगर आप इसे यहाँ पढ़ सकते हैं। यह एक बहुत ही अच्छे सेमिनार के बारे में है जिसमें मैं गयी थी। वहां बहुत कुछ सीखा और बहुत लोगों से मुलाक़ात भी हुई। एक ख़ास अनुभव रहा :

क्वालिटी क्लब मीटिंग्स सेमिनार , AOU , कुवैत २०१८ 



'बिन तेरे सनम' गिटार कवर

Image
कुछ दिनों से मेरी तबियत ठीक नहीं चल रही। गले का इन्फेक्शन वगैरह लगा हुआ है। फिर भी एक कवर बना ही लिया। काफी दिनों से बनाना रुका हुआ था। मूवी है यारा दिलदारा।

मैंने इस बार कुछ नया किया है। हर कॉर्ड पर आधा प्लकिंग और आधा strumming बजाया है। मुझे ये संजोग पसंद आया और मुझे बजाने में भी अच्छा लगा। गाना पुराना है और मुझे लगता है कि इस स्टाइल पर अच्छा बजा है।

आप इसे मेरे फेसबुक म्यूजिशियन पेज  पर भी देख सकते हैं : गिटार गॉर्जियस 

मेरे यूट्यूब पर देखें : बिन तेरे सनम गिटार कवर 

इसी पोस्ट को मेरे इंग्लिश ब्लॉग पर पढ़ें : Bin Tere Sanam Guitar Cover


मौर्या कला परिसर, कुवैत में बुक इंटरैक्टिव सेशन २०१८

Image
सबसे पहले, मैं आपको बता दूँ कि मेरी किताब - द शैडो ऑफ़ डार्कनेस - पर एक बहुत अच्छा ऑफर चल रहा है। दिसंबर के इस पूरे महीने में यह अच्छे दाम पर उपलब्ध है। इसकी शिपिंग चार्जेज यानी Rs. 98 /- पूरी तरह से माफ़ है। तो आज भी अपने लिए एक कॉपीAmazon या Flipkart से खरीदें।  ------------------------------------- अगर आप मेरे ब्लोग्स के नियमित पाठक हैं तो अब तक आप जान चुके होंगे कि मैं कुवैत में तीन सम्मानित संगठनों (organizations) - मौर्या कला परिसर (एम्. के. पी.), राइटर फोरम और टेम्बर टॉकर टोस्टमास्टर्स - की सदस्य हूँ।

उड़ने की ज़िद

Image
आसमां में उड़ने की ज़िद पहले कभी यूँ न थी, पंख भले ही आज छोटे हों, आत्म-विश्वास का समंदर ग़र साथ हो  और साथ हो पैरों तले ज़मीं  तो आसमां भी एक दिन घुटने टेक देता है। 
~ प्रियंका बरनवाल ~ 

ग्रिंच के साथ मस्ती (टोस्टमास्टर्स सेशन दिसंबर ४ २०१८)

बीते मंगवार को हमारे टोस्टमास्टर्स इंटरनेशनल क्लब में उत्सव का माहौल था। अभी भी नहीं जानते इस क्लब के बारे में? तो यहाँ पढ़ें। आपको उनकी कार्यशैली पसंद आएगी। 
सेशन का थीम था क्रिसमस और अगर आप सोच रहे हैं कि सांता क्लॉस ज़ोरों से हो हो हो करते हुए आया होगा तो आप गलत हैं! दरअसल, इसका ठीक विपरीत हुआ। हमारा होस्ट कोई और नहीं बल्कि ग्रिंच था। 
 ग्रिंच का रूप धारण किये टोस्टमास्टर का हुलिया मज़ेदार, चतुर और हाँ, बेहद रचनात्मक था। सभी लोगों को बहुत पसंद आया। अब चूँकि बहुत ही सारे फोटोज हैं तो मैंने सबसे अच्छे तरीके से साझा  करने की युक्ति निकाली - एक छोटे से मूवी की तरह। 

मैंने आह काउंटर का रोल लिया था।  एक आह काउंटर को स्टेज दिए जाने वाले सभी भाषणों (speeches) में अनावश्यक विस्मयादिबोधक (interjections) चिन्ह और आवाज़ों जैसे Umm, err, uh, like, you know, so, well इत्यादि को पहचान कर उन्हें बताता है। 
मैंने टोस्टमास्टर अभी एक सप्ताह पहले ही ज्वाइन किया है तो मैं थोड़ी बेचैन या नर्वस थी मगर साथी टोस्टमास्टर्स की सहायता से मैं अपना रोल बखूबी निभा पायी। मुझे 'बेस्ट फर्स्ट टाइमर' का सर्टिफिके…

तनाव से भरे जादुई तीस मिनट्स

Image
तनाव। 
यह शब्द ही तकलीफ देने के लिए काफी है, है ना?
चाहे ख़ुशी हो या ग़म, सफलता हो या विफलता या कोई और भावना, तनाव एक ऐसी भावना है जिसके बिना रहा नहीं जा सकता। ये हमारी ज़िन्दगी का उतना ही अभिन्न हिस्सा है जितना कि खाना खाना और पानी पीना। 
तनाव अच्छा और स्वस्थ हो सकता है बशर्ते इसे सही मात्रा में लिया जाए मगर अक्सर ऐसा होता है कि कितनी बातें हमारे नियंत्रण से बाहर हो जाती हैं और तभी, सही मात्रा अति में बदल जाती है। नतीजा? इंसोम्निया (insomnia), बेचैनी, मन में हलचल, और कभी कभी सोने की बीमारी भी। 
इन सभी बातों में एक बात स्थायी है - तनाव। कम हो या ज़्यादा, तनाव होना ही होना है। तो इसे कैसे सम्हालें ताकि ये हमारी दिमागी शांति के साथ खिलवाड़ न कर पाए?
सामान्यतौर पर क्या सुझाव दिए जाते हैं, उसकी भी मैं चर्चा करूंगी मगर पहले वो सुझाव जो मैंने हाल ही में सीखा है या सटीक तौर पर कहूँ, तो पढ़ा है। और ये बाकी सारे सुझावों से बेहतरीन है।

KNWCT के साथ अभ्यास मैच

Image
क्या आपने मेरे टोस्टमास्टर बनने पर लिखा गया पोस्ट पढ़ा? टोस्टमास्टर इंटरनेशनल एक दिलचस्प संस्था है जो कि अलग और ख़ास नज़रिये से बना है। उसके  बारे में यहाँ पढ़ें। 
इसी बीते शनिवार यानी नवंबर एक को हम सुलेबिया ग्राउंड गए थे। हमारे बेटे की अकादमी का कुवैत नेशनल वीमेन क्रिकेट टीम (KNWCT) के साथ अभ्यास मैच था। मुझे यह जानकार आश्चर्य हुआ कि कुवैत जैसा देश जो इस खेल को लेकर शायद ही कभी उत्साहित रहता है में एक वीमेन टीम भी है। खैर, जानकार अच्छा लगा। 
यहाँ सर्दी का मौसम है और आप अगर कुवैत आने की सोच रहे हैं तो इससे बेहतर कोई और समय नहीं। हम ग्राउंड पर थोड़ा जल्दी ही पहुँच गए। शाम थोड़ी सर्द थी मगर हम अपने जैकेट वगैरह लेकर गए थे। वहां हमने KNWCT के कोच को अपनी टीम को मैच से पहले प्रैक्टिस कराते देखा। मुझे उनसे बात करनी थी तो मेरे बेटे के कोच ने मेरी उनसे पहचान करा दी। बातचीत के दौरान मैंने उनसे कुछ सवाल पूछे जैसे ये लड़कियां कब प्रैक्टिस करती हैं , क्या उम्र होगी वगैरह। उन्होंने बताया की सोलह की उम्र से लेकर चालीस तक की भी प्लेयर हैं। और असल में , चालीस की खिलाड़ियां ज़्यादा फिट हैं।

एक और पहचान: टोस्टमास्टर प्रियंका

Image
इससे पहले कि मैं आपको टोस्टमास्टर  प्रियंका के मायने समझाऊं,  आप पहले Writers's Forum में मेरे पहले दिन के बारे में पढ़ें। मुझे यकीन है कि आपको पसंद आएगा।

मौर्या कला परिसर और Writers' Forum के बाद अब मैंने टोस्टमास्टर्स की सदस्यता ली है:

अब, टोस्टमास्टर होने का मतलब है टोस्टमास्टर्स इंटरनेशनल ग्रुप/समूह का हिस्सा बनना और इसके किसी एक क्लब में शामिल होना। टी. आई. का विस्तार कितने ही क्लब्स के रूप में बहुतेरे देशों में है। यह ख़ास संस्था  मूलरूप से बातचीत और नेतृत्व कौशल को बढ़ावा देती है। और भी ज़्यादा और सटीक जानकारी के लिए, उनके वेबसाइट पर जाएं:

टोस्टमास्टर्स इंटरनेशनल 

और आप एक बारे इसके सदस्य बन जाते हैं तो आपके नाम के आगे टोस्टमास्टर लग जाता है। जैसे कि मैं, टोस्टमास्टर प्रियंका।

🌺स्वच्छ भारत🌺

Image
'स्वच्छ भारत' एक खूबसूरत और महत्त्वपूर्ण कविता है जिसे मेरे दोस्त - अमीरुद्दीन अमीर जी - ने लिखी है। अमीरुद्दीन जी एक बेहतरीन लेखक हैं और उनकी इच्छा है कि इस कविता के ज़रिये लोगों में साफ़- सफाई के प्रति जागरूकता बढ़े। स्वच्छ भारत

हम है इसके वासी इसकी हम करे रक्षा पाक रखे घर आंगन और साफ करे कचरा  गल्ली अपनी गाव अपना मोहल्ला अपना  साफ रखे इसको ये फर्ज है अपना  बीमारी से बचना गर तो पाक है रेहना  पाक रेहना साफ करना कूड़ा और कचरा 
मच्छरों का मक्खीयों का घर है ये कचरा  साफ करो इसको इस्से है बडा खतरा  ढेन्गू मलेरीया पैदा करता ये कचरा  बीमारी का ज़रिया बनता है ये कचरा  तन्दुरूस्ती चाहिए गर दूर करो कचरा  हम हैं इसके वासी इसकी हम करे रक्षा

बारिश का अक्स

Image
शीशों से रिश्तों के दामन में नासमझी की दरार न आ जाए इतना यकीं रखना, ऐ दोस्त! थोड़े नासमझ तुम भी हो और थोड़े हम भी!
पाँव हैं कि आगे बढ़ते हैं मन है जो पीछे को दौड़ता है इसी कश्मकश में देखना ज़िन्दगी न निकल जाए थोड़े सुस्त तुम भी हो तो कुछ ठहरे से हम भी!


किन किन सवालों का करूँ हिसाब अनसुलझे से हैं उनके जवाब, फिर भी समय मिले तो आना ज़रूर कुछ बेख़ौफ़ तुम भी हो तो कुछ दिलेर हम भी!
ज़िन्दगी की नुक्ताचीनी से जब भी फुर्सत मिली दिल कुछ यूँ अनमना सा हो उठता है, जिन राहों की कोई मंज़िल न थी उन्हीं किनारों पर ही क्यों छाँव मिली ?
बारिश की बूँदें ही काफी हैं शोर मचाने के लिए, फिर भी कुछ बातें बची हों तो कहना ज़रूर! कुछ किस्से तुम्हारे भी अधूरे हैं तो कुछ पैमाने हमारे भी !
~ प्रियंका बरनवाल ~ 

Writers' Forum, Kuwait में मेरा पहला दिन

Image
इससे पहले कि हम आज के मसले पर पहल करें, क्या आपने कुवैत में हाल ही में हुए बयालीसवें अंतराष्ट्रीय बुक फेयर के बेहतरीन पलों और मेरे अनुभव को देखा? नहीं? नाम पर क्लिक कीजिये और आप स्वतः ही वहां पहुँच जायेंगे। 
चलिए अब बात करते हैं एक और खूबसूरत अनुभव के बारे में। 
पिछले साल भारत छोड़ने के पहले मुझे पता ही नहीं था कि ज़िन्दगी किस ओर ले जाएगी। कुवैत मेरे लिए नए अनुभवों से भरा है। यह निश्चित ही अप्रत्याशित है मगर इसका स्वागत है। 
अभी कल ही मैंने राइटर्स फोरम, कुवैत ज्वाइन किया। और भी अधिक जानकारी के लिए, कृपया आगे पढ़ें। 
ऊपर की पिक्चर मीटिंग के अंत में ली गयी है। 
इस फोरम में दरअसल और भी सदस्य हैं। कुछ बाहर गए हैं तो कुछ दुसरे ज़रूरी काम में थे इसीलिए नहीं आ पाए। कोई बात नहीं, हमने चौदह की संख्या से शुरू किया और मेरे नज़रिये से चौदह काफी हैं एक खुशनुमा शाम का आगाज़ करने के लिए। 
मुझे कई लोगों से मिलने का अवसर प्राप्त हुआ। मैं पहुंची तो देखा वहां का माहौल हल्का और दोस्ताना है। लोग बात चीत करने में मशगूल थे, एक दुसरे की चुटकियां लेते रहे, और साथ ही साथ पूरी शाम को ज्ञान के मोती के धागों में पिरो…

४२ वां अंतर्राष्ट्रीय बुक फेयर, मिश्रफ, कुवैत 2018

Image
कैसा लगेगा आपको अगर मैं ये  कहूँ कि हाल ही में मैं एक अंतर्राष्ट्रीय बुक फेयर (International Book Fair) में गयी थी? और वो भी कुवैत में? यकीन नहीं हुआ? कर लीजिये क्योंकि ये सच है।

नैप्पीली एवर आफ्टर

Image
अगर आप इस सोच में पड़ गए हैं कि शायद मैं हैप्पिली एवर आफ्टर को सही तरीके से लिखना भूल गयी हूँ तो इतना बता दूँ कि नाम बिलकुल सही है।

नैप्पीली एवर आफ्टर असल में एक अमेरिकन रोमांटिक कॉमेडी फिल्म है और यह तृषा आर. थॉमस द्वारा लिखी गयी इसी नाम पर आधारित किताब पर है। इसकी मुख्य भूमिका में वायलेट (सना लेथन) है और यह मूवी एक नेटफ्लिक्स ओरिजिनल है जो अभी हाल ही में सितम्बर २१, २०१८ को आयी है। 
वायलेट या  वाय (दोस्तों और परिवार द्वारा दिया गया नाम ) एक विज्ञापन कार्यकारी (या, एडवरटाइजिंग एक्सेक्यूटिव ) है। उसकी ज़िन्दगी उसके सर के बालों के आस पास ज़्यादा घूमती है। अगर वो इनका हर दिन,  दिन रात, ख्याल न रखे तो ये एक बहुत बड़ी परेशानी का कारण बन सकते हैं। इसके बाल बहुत ही घुंघराले हैं जो आसानी से नियंत्रण के बाहर जा सकते हैं। इसीलिए वाय को अपने बालों का भरपूर ख्याल रखना पड़ता है।

गिटार बेहतर बजाने के ३ तरीके #2

Image
पिछले पोस्ट में हमने बहुत सुन्दर तरीके से ब्लॉग शुरू करने के बारे में बातें की थीं। और ऐसा करने के लिए मैंने आपको एक नहीं दो नहीं बल्कि तेरह बेहतरीन और सही वजहें भी दीं।  उम्मीद है कि आपने ध्यान दिया होगा और अमल भी किया होगा। 
पढ़िए १३ वजहें क्यों आपको एक ब्लॉग शुरू करना चाहिए 
आज बात करते हैं गिटार के बारे में। पहले हमने पढ़ा गिटार बेहतर बजाने के ३ तरीके #1  (पढ़ने के लिए क्लिक करें) . पहलेपहल तो केवल एक पोस्ट लिखने का विचार था मगर चूँकि गिटार में बेहतर बनने के अनगिनत तरीके हैं , मैंने निश्चय किया कि एक पोस्ट के बदले इसे एक सीरीज में तब्दील कर दिया जाए जिसके हर पोस्ट में गिटार बजाने के 3 तरीके दिए होंगे। 3 पढ़कर कर ख़तम करना काफी आसान है, नहीं?
पहली बात कि मैं कोई प्रोफेशनल गिटारिस्ट नहीं हूँ। मैं इसे अपने गिटार के प्रति प्रेम के लिए बजाती हूँ। तकरीबन तीन साल हो चुके हैं मुझे गिटार बजाते हुए। इस सफर में मैंने कुछ तरीके सीखे और अपनाये हैं जिनसे मेरा प्रदर्शन बेहतर हुआ है। तो मैं जितनी भी युक्तियाँ या टिप्स आपसे यहाँ साझा करूंगी , इत्मीनान रखिये कि वो मेरे अनुभव से प्रेरित हैं और सही हैं। …

१३ वजहें क्यों आपको एक ब्लॉग शुरू करना चाहिए

Image
आपको पता है जब मेरे रूटीन का पहिया अपनी पटरी से सरक जाता है और रोज़ की दिनचर्या आप-धापी में बदल जाती है तो क्या मुझे लिखने के लिए प्रेरित करता है ? मेरा ब्लॉग, या साफ़ कहूँ तो ब्लोग्स। ब्लॉग वो जगह है जहाँ आप अपनी भावनाओं को व्यक्त कर पाते हैं और साथ ही साथ ये मरहम का भी काम करता है। मैं एक नहीं वरन दो ब्लोग्स लिखती हूँ - पेजेज फ्रॉम माय लाइफ अंग्रेजी में और पेजेज फ्रॉम माय लाइफ इन हिंदी (जिसे आप अभी पढ़ रहे हैं)। 
मगर चलिए पहले बात करते हैं जिसके बारे में हम यहाँ इकठ्ठा हैं - मैं बताउंगी आपको कि आपको क्यों एक ब्लॉग शुरू करना चाहिए और उससे भी ज़्यादा, कैसे। 
१. साझा करने का बेहतरीन जरिया 
जब लोगों को पता चलता है कि मैं ब्लॉग लिखती हूँ तो एक सवाल करीब करीब बिजली की गति से मुझ तक पहुँचता है - आपका ब्लॉग किस बारे में है ?

२०१८ ... सबसे बेहतरीन दिवाली

Image
कुछ दिनों पहले मेरा बेटा रुआंसा सा होकर मेरे पास आया। मैं रसोई में किसी काम में व्यस्त थी। बेटे ने कहा ,
मम्मा ! हम इंडिया में क्यों नहीं हैं? वहां हम दिवाली कितने मज़े से मना रहे होते। यहाँ हमारे पास करने को कुछ भी नहीं है। आई मिस इंडिया!
अब कुवैत में रहकर भारतीय त्यौहार मनाने की अपनी अलग कहानी है। सबसे पहले तो ये एक पूरी तरह से दूसरा देश है, यहाँ की संस्कृति भारत से कहीं भी मेल नहीं खाती और आखरी मगर बेहद महत्त्वपूर्ण बात कि दिवाली यहाँ पर मनाई ही नहीं जाती। अगर हम अमेरिका, ब्रिटैन यहाँ तक कि दुबई में भी होते तो बात अलग होती। इन देशों में तो दिवाली इतनी धूमधाम से मनाई जाती है जितना कि शायद हमारे भारत में नहीं। 
स्वभाविक तौर पर कुवैत को त्यौहार के रंग में न रंगीन होने के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। दिवाली यहाँ का तो त्यौहार ही नहीं है। मैंने अपने बेटे को समझाया ,
तुम्हें परेशान होने की ज़रुरत नहीं। बस इतना याद रखो  - एक परिवार की तरह हम जहाँ साथ हैं वही खुशियां मनाने के लिए काफी है। 
मेरा ये जवाब उसके दिल को किस गहराई तक छू गया है इसका अंदाजा मुझे तब लगा जब मेरे पति देर शाम ऑफिस से …

ऐ दिल है मुश्किल गिटार कवर + टुटोरिअल

Image

आते जाते हँसते गाते गिटार कवर + टुटोरिअल

Image

क्या होगा अगर आप अपने बच्चे के लंच के डिब्बे में चम्मच रखना भूल जाते हैं ?

वो खाने से भरे हुए डिब्बे के साथ घर लौटता है, च्च!
केवल आज ये च्च पल नहीं था। असल में ये अरे नहीं! वाला पल था  सदमे, दुःख और गुस्से से भरा। मैं खुद से नाराज़ थी मगर अपने बच्चे के लिए दुखी। मेरा उसके लंच के डिब्बे में चम्मच रखना भूल जाने का मतलब था कि उसने एक सैंडविच, थोड़े अंगूर और एक संतरा ही  खाया। मेरी भूल की वजह से आज मेरा बेटा भूखा घर आया। 
यूँ तो मैं ऐसी स्थितियों का पहले ही ख्याल रखती हूँ। मैं उसके बैग में हमेशा एक या दो चम्मच अलग से रखती ही हूँ। साफतौर पर, आज जो हुआ वो पहली दफा नहीं था। मैं पहले भी दो - तीन दफे चम्मच रखना भूल चुकी हूँ और उसने किसी तरह हाथ से खाना खाया मगर फिर भी मैं दुखी होने से खुद को रोक न सकी। आज वो चावल और सब्ज़ी हाथ से नहीं खा पाया। 
तो मैंने सबसे पहले उसके बैग में दो चम्मच पैक किये और फिर जल्दी से रसोईघर में जाकर उसके लिए कुछ अच्छा स्वास्थ्यपूर्ण नाश्ता बनाया। 
तो अगर आप पेरेंट्स हैं तो मेरे जैसे पैरेंट से सीख लीजिये। अपने बच्चे के बैग में एक चम्मच और कांटे का एक्स्ट्रा सेट रखें ताकि आपको आज जैसा च्च पल से सामना न पड़े। 
इसी लेख को इंग्लिश में पढ़ें : What h…

तुझसे नाराज़ नहीं ज़िन्दगी (फिल्म: मासूम) गिटार कवर

Image
गिटार पर कोई गाना गाकर उसे अपलोड करने में कुछ समय हो गया है।  क्यों? ये वीडियो देखिये और आप स्वतः ही जान जायेंगे। जी हाँ, आपने बिलकुल सही पहचाना। ये एक तरीका है आपको वीडियो देखने पर मजबूर करने का। उम्मीद है कि पसंद आएगा।

मेरा फेसबुक संगीतकार पेज को पसंद यानी Like करें: गिटार गॉर्जियस 

मेरे यूट्यूब चैनल के सदस्य बनें (यानी Subscribe करें): गिटार गॉर्जियस द्वारा तुझसे नाराज़ नहीं ज़िन्दगी 


क्रॉफोर्ड विल्सन डिसूज़ा द्वारा लाइफ मैनेजमेंट विद कलर्स ऑफ़ लाइफ वीकेंड ब्लास्ट (Oct 12th 2018)

गत वीकेंड को मैंने यहाँ एक बहुत ही बढ़िया वर्कशॉप किया जिसकी डिटेल्स नीचे वाली लिंक में दिए गए हैं। चूँकि पोस्ट बहुत लम्बा है और समय की थोड़ी कमी है, इसीलिए हिंदी में अनुवाद ज़रा मुश्किल है।  किसी भी कष्ट के लिए खेद है।

पढ़ें: Life Management with Colours of Light Weekend blast #1 (Oct 12th 2018)

Life Management with Colours of Life Weekend blast #2 (Oct 13th 2018)

इन पोस्ट में तसवीरें और ऐसी बहुत सारी बातें हैं जो मुझे और आपको एक बेहतर ज़िन्दगी जीने के लिए प्रेरित करेंगी। अगर आपको अच्छी लगे तो अपनी राय ज़रूर व्यक्त करें नीचे कमेंट बॉक्स में।

धन्यवाद !

गिटार बेहतर बजाने के ३ तरीके #1

Image
सब पहले एक अच्छी खबर बताती हूँ। मेरा हाल ही का ब्लॉगपोस्ट इंडियंस इन कुवैत यानी आई. आई. के. (IIK) के पहले पृष्ठ पर छपा है। आई. आई. के. कुवैत में भारतियों की सबसे बड़ी कम्युनिटी है। मैं तहेदिल से शुक्रगुज़ार हूँ इस सुन्दर अवसर के लिए। पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें:
इंडियंस इन कुवैत में प्रियंका बरनवाल का आर्टिकल 
चलिए अब बात करते हैं उस विषय की जिसके लिए हम यहाँ पर हैं। मैंने गाने के कवर्स और टुटोरिअल्स शेयर किये हैं। अपनी गिटार जर्नी यानी यात्रा के बारे में भी लिखा है मगर कोई ऐसा लेख नहीं लिखा जिसमें मैंने गिटार बेहतर बजाने के तरीके बताये हो। 

मगर चलिए, इस समस्या को यहीं विराम देते हैं। मैं आज आपको गिटार पर बेहतर बनने के ३ बेहतरीन तरीके बताने जा रही हूँ। मैं स्वयं ३ सालों से गिटार बजा रही हूँ और अब लगता है कि कुछ सीखा सकती हूँ। इस तरीकों ने मुझे समय के साथ बेहतर बनाया है। 
१. ट्यूनिंग 
अगर आपको सर्दी खांसी हो तो क्या आप गा सकते हैं? नहीं? मुझे भी कुछ ऐसा ही लगा। 
अगर आप गिटार को ट्यून नहीं करेंगे तो इसकी आवाज़ सही नहीं आएगी। भारत में अपने गिटार क्लास में सबसे पहले मैंने यही बात सीखी थी। गिट…

क्रॉफोर्ड विल्सन डिसूज़ा द्वारा आयोजित सेमिनार Life Management with Colours of Life

Image
बीते शुक्रवार को हमने मौर्य कला परिसर द्वारा आयोजित ५वां दिनकर दिवस मनाया। वह दिन काफी यादगार रहा। 
पिछले सप्ताहांत की ही तरह इस सप्ताहांत भी मैं कुछ रोचक करना चाह रही थी। पता चला कि गुरुकुल, जो मेरे घर के बेहद नज़दीक है, जीवन प्रबंधन यानी लाइफ मैनेजमेंट पर एक सेमिनार आयोजित कर रहा है। अब क्या कहूँ? समस्या का समाधान चुटकी में हो गया। 
सेमिनार का नाम Free Seminar on Life Management with Colours of Life by Crawford Wilson D'Souza रखा गया था। इसका उल्लेख जैसे दिया गया था वैसा ही देती हूँ:

भारतीय दूतावास में मौर्य कला परिसर द्वारा आयोजित दिनकर दिवस 2018

Image
अभी हाल ही में हमने मौर्य कला परिसर और भारतीय दूतावास (Indian Embassy), कुवैत के संयोजन से आयोजित ५ वां दिनकर अवार्ड्स समारोह और हिंदी दिवस एक साथ गत शुक्रवार सितम्बर २८ २०१८ को मनाया। यह दिन हमारे राष्ट्रकवि श्री रामधारी सिंह दिनकर जी के जन्मदिन (सितम्बर २३) के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।  हिंदी दिवस सामान्यतौर पर सितम्बर १४ को मनाया जाता है। 
भारतीय दूतावास, कुवैत के बारे में अधिक जानकारी के लिए क्लिक करें 
मौर्य कला परिसर,कुवैत के बारे में अधिक जानकारी के लिए क्लिक करें 
तीन बातें जानने योग्य हैं:
१. मैं एक भारतीय हूँ  २. मेरी मातृभाषा हिंदी है, और  ३. मैं कुवैत में रहती हूँ यानी भारत से बहुत दूर 
कहने की ज़रुरत नहीं मुझे इस समारोह में जाने की कितनी उत्सुकता रही होगी। हम मौर्य कला का हिस्सा हैं और उनके कुछ कार्यक्रमों में पहले भी गए हैं। मगर जब बात हिंदी दिवस की हो, एक दिन हमारी मातृभाषा को समर्पित, तब तो इसे छोड़ पाना संभव ही नहीं था। आखिरकार, कौन अपनी मातृभाषा की मधुरता का आनंद नहीं लेना चाहेगा ?

ज़िन्दगी एक निरंतर सीख है - मिस लीडिआ कत्तान, मिरर हाउस कुवैत की निर्माता, के साथ एक साक्षात्कार

Image
ऐसा विरले ही होता है मगर जब भी होता है ज़िन्दगी भर के लिए यादग़ार होता है। 
तकरीबन दो हफ़्तों पहले मैं मिस लीडिआ अल कत्तान से मिली। मिस लीडिआ कत्तान मिरर हाउस या आइना घर, कुवैत की निर्माता और मालिक हैं। हम घर देखने पहुंचे मगर क्या देखने को मिलेगा, इसकी ज़्यादा कोई कल्पना नहीं  थी मगर एक बार जब घर की चारदीवारी के बाहर खड़े हुए तो जो दिखा वो आगे की उम्मीदों का बस एक नमूना था। घर के अंदर की दीवारें शीशे की चिड़ियों, ग्रहों, तमाम कहानियों इत्यादि से सजे हुए हैं। चाहे फ़र्श हो, दीवारें, छतें या सीढ़ी, मिरर हाउस, कुवैत रचनात्मकता का अनुपम उदाहरण है मगर उससे भी बड़े अचरज  से सामना तब हुआ जब टूर के अंत में मैंने मिस लीडिआ का इंटरव्यू यानी साक्षात्कार लिया। महसूस हुआ कि मिस लीडिआ का व्यक्तित्व अपने घर से भी महान है। 
पढ़ें एक शाम मिरर हाउस, कुवैत में 


मेरी माँ, मैं और शाम की चाय

Image
हर पल में खूबसूरती छिपी है। बस हमें उसे ढूंढने की ज़रुरत है। 
जैसे चाय का समय ले लीजिये। ये दिन का बहुत ही साधारण सा समय है। पैन को स्टोव पर रखिये, सामग्री मिलाइये, पकाइये, छानिये  और मज़े लीजिये। इससे भी बेहतर, जब कोई और ये सारा काम करता है और फिर भी आपको एक बढ़िया चाय पीने को मिल जाती है। लेकिन जैसा मैंने अभी कहा, हर पल में खूबसूरती है. बस आपको देखने की ज़रुरत है। मेरे लिए चाय का समय वास्तव में दिन के सबसे ख़ास पलों में आता है।

एक शाम मिरर हाउस, कुवैत में

Image
नोट:मिरर हाउस के बारे में जानने के लिए इसके नाम पर कहीं भी क्लिक कीजिये।  


हम बीते शुक्रवार की शाम को मिरर हाउस गए। कुवैत में बाकी पर्यटक स्थानों से अलग, आपको यहाँ पर आने के लिए अपॉइंटमेंट यानी एक नियत समय लेना होगा, क्योंकि मिरर हाउस मिस लीडिआ द्वारा निर्मित और संचालित है और ये उनका अपना घर है। 
वहां जाने के पहले मेरी अपनी कल्पनाएं थीं।

हिंदी दिवस स्पेशल: मायापुरी, मेरा पहला उपन्यास

Image
१४ सितम्बर देश भर में हिंदी दिवस के तौर पर मनाया जाता है। चूँकि हिंदी मेरी मातृभाषा है, सोचा कि आज कुछ ख़ास और अलग शेयर करना चाहिए। थोड़ा सोच-विचार करने पर, यादों की गहराईयों को टटोलने पर एक ऐतिहासिक पल हाथ आया - मायापुरी
स्कूल के दिनों की पुस्तक नहीं बल्कि मेरे जीवन का  पहला उपन्यासहै। 'मायापुरी' मशहूर लेखिका शिवानी द्वारा रचित है। मैं शायद चौदह या पंद्रह साल की रही हूँगी जब मैंने ये पढ़ी थी। मुझे ठीक ठीक याद नहीं कि किसने पढ़ने को कहा था मगर जिसने भी मुझे ये किताब दी थी मैं तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ। मायापुरी मेरी ज़िन्दगी का पहला उपन्यास है और आज भी मेरे दिल के उतने ही क़रीब है जितना उस दिन था जिस दिन मैंने इसे पढ़कर बंद किया था। शोभा और सतीश की कहानी ने मेरा अंतर्मन छू लिया था। 

अनिश्चितता

Image
आज सुबह &Prive (एंड प्री-वे) पर एक मूवी आ रही थी। ये चैनल उन लोगों के लिए है जो दूसरी साइड या other side महसूस करते हैं। इस चैनल का पंच लाइन ही है - For those who feel the other side. सच कहूँ तो मुझे  कोई दूसरा साइड दिखाई तो नहीं देता मगर हाँ ! ये चैनल मैं अक्सर दूसरा साइड महसूस करने के लिए ज़रूर लगाती हूँ।  इसपर अच्छी फिल्में आती हैं। 
खुद को मना करने के बावजूद मैं अपने नाश्ते की प्लेट के साथ देखने बैठ गयी। मैं असल में कोई अच्छी मूवी देखने के उद्देश्य से बैठी थी। पता चला कि एक अच्छी मूवी आ भी रही है और बस १० मिनट पहले ही शुरू हुई है। 
मूवी का नाम है - द लवर्स। मूवी की जानकारी टीवी पर संक्षिप्त रूप में दी होती है। वैसे तो मैं रोमांटिक मूवीज देखना पसंद नहीं करती मगर इस मूवी की जानकारी कौतुहल पैदा करने वाली ज़रूर थी।

कैसे सम्हालें दो रोज़गार एक साथ

मैं एक लेखिका और संगीतकार हूँ।  लेखन और संगीत मेरे जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। अगर लिखने से प्यार न होता तो आज मैं अपना नाम किताबों पर ना देख पाती और अगर गिटार के प्रति मेरा अनुराग ना होता तो संगीत में आज इतनी रूचि नहीं होती। और ये दोनों रोज़गार एक साथ कर पाने के लिए मैं बहुत आभारी हूँ। 
जहाँ दोनों कर पाना बहुत अद्भुत है, अनुभव और ज्ञान से ओतप्रोत है, सिक्के का दूसरा पहलु ये भी है कि दोनों एक साथ करना ख़ुशी से ज़्यादा तनाव से भरा है। मैं अक्सर सोच में पड़ जाती हूँ कि दोनों काम एक साथ कैसे करूँ? दोनों ही विस्तृत हैं, सितारों से भरे आसमान की तरह या एक माँ के ह्रदय जैसा। कोई थाह नहीं मगर बहुत सारी पेचीदगियों से भरा हुआ। 
फिर भी मैं करती हूँ मगर उससे भी ज़्यादा महत्त्वपूर्ण, सफल रहती हूँ। कैसे? चलिए, आज बात करते हैं उन तरीकों की जिन्हे अपना कर मैं दोनों काम एक साथ कर पाती हूँ जो शायद आपके लिए भी मददगार हो।  ------------------------------------
#१ विभाजन 
सोच से भी कहीं ज़्यादा मेहनत आपको दोनों काम करते समय डालनी है। समय का उचित विभाजन दिन को व्यवस्थित करने की सबसे महत्त्वपूर्ण चाबी है। 
मैं सामा…

मेरे जीवन की नयी त्रासदी

Image
बहुत समय बाद मैंने अपना गिटार  बजाया। कह नहीं सकती कि कितना खूबसूरत महसूस हुआ। ये छोटा सा वीडियो कल शाम का है।

कैमिनो आइलैंड पर एक छोटी मनोरंजक यात्रा

Image
अभी दो दिन पहले मैं कैमिनो आइलैंड से लौट कर आयी हूँ। कुछ ही दिनों की यात्रा थी मगर मुझे बहुत अच्छा लगा। 
वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि कैमिनो आइलैंड प्रसिद्ध लेखक जॉन ग्रीषम की लिखी एक किताब है। उम्मीद है उनका उपनाम हिंदी में ऐसे ही लिखा जाता है ना कि ग्रीशम या ग्रिशम। अगर मैं उनके नए नाम के मुताबिक  जाऊं जो मैंने उन्हें इस किताब को ख़तम करने के बाद दिया है तो वो लेपर्ड ग्रीषम होंगे। क्यों, अभी जल्द ही पता चल जायेगा आपको।

दस लोग. दस सीख. एक सवाल. - टीचर्स डे स्पेशल

Image
हम अपने गुरुओं का सम्मान करते हैं और जब एक दिन उन्हें याद करने का अच्छा बहाना मिल जाता है तो उस दिन को हम टीचर्स डे कहते हैं।

भारत में टीचर्स डे सितम्बर ५ को मनाते हैं। अलग - अलग देशों में ये दिन अलग तिथियों पर मनाया जाता है। मलेशिया में टीचर्स डे ५ मई को मनाते हैं। न्यूज़ीलैण्ड में इसे अक्टूबर २९ को मनाते हैं। जर्मनी, यू. ए. ई. और ब्रिटैन में ५ अक्टूबर को। ऑस्ट्रेलिया में जहाँ ये दिन ओक्टोबर के आखरी शुक्रवार को मनाते हैं वहीँ अमेरिका में इसे मई के पहले पूरे हफ्ते (यानी सात दिन लगातार) Teacher's Appreciation Week (अध्यापकगण की सराहना) के दौरान मनाते हैं।

पूरी  लिस्ट के लिए यहाँ क्लिक करें: टीचर्स डे किस देश में कब 

देश, कारण और मनाने की समयसीमा चाहे जो भी हो, इन सब में एक शिक्षक सार्वजनिक (common) है: समय। समय से बड़ा कोई शिक्षक नहीं और शायद इसी बात ने कल एक नए विचार को जन्म दिया। हर साल की तरह अपने गुरुओं और माता-पिता को धन्यवाद देने के बजाय इस बार मैंने दस लोगों से एक सवाल करने का सोचा। बहुत उम्मीद थी कि उनके जवाब भिन्न होंगे। इसीलिए , दस सीख। कीमती। आज़माया हुआ। और अंततः साझा किय…

चलिए प्रार्थना करें हमें नापसंद करने वालों के लिए

मान लीजिये आपके घर में एक छोटा बच्चा है जिसने अभी - अभी रेंगना सीखा है। आपको मानने की भी ज़रुरत नहीं अगर आपके पास पहले से ही एक है। अब, उस बच्चे ने अभी अभी चलना सीखा है और ये उसके अब तक की छोटी सी ज़िन्दगी का सबसे महानतम कार्य है। पहले वह जहाँ दिन भर एक जगह बैठा रहता था, अब वह हिल सकता है, चीज़ों को खुद से छू सकता है।  ये सब करना उसके लिए किसी विश्व भ्रमण पर जाने से कम नहीं है। घर, आखिरकार, एक बच्चे के लिए पूरा विश्व है। 
अब ऐसे में होने वाली घटनाओं का अनुमान लगा पाना आसान है कि जब वो सुबह उठता होगा या उससे भी बुरा... देर रात को। वो कमरे में जाता है, सजावट/प्रसाधन की सारी चीज़ें  उलट-पलट कर देता है। आप जल्दी से कमरे में जाते हैं और अभी ठीक कर ही रहे होते हैं कि वो रसोई में घुस जाता है और दराज़ें खोलना शुरू कर देता है। चम्मच, कांटें, गिलासें, थालियां, भगोने इत्यादि फ़र्श पर धड़ाम से गिरने लगते हैं। आप कमरे में तेल की शीशी का ढक्कन लगाना छोड़ रसोई में भागते हैं मगर जनाब तो कब का इस जगह को अलविदा कह चुके हैं। अब वो छोटे से महाशय बैठक कक्ष यानी लिविंग रूम में टी.वी. के पास खड़े हैं जिसका

क्या महिलाएं पुरुषों से कमज़ोर हैं? - जन्माष्टमी स्पेशल लेख

Image
मैं बैठी थी अपने गिटार का अभ्यास करने मगर सोचा कि पहले जन्माष्टमी की शुभकामनाएं अपने परिवारजनों, मित्रों और पाठकों को दे दी जाएं।

जन्माष्टमी श्री कृष्ण (हिन्दू देवता) के जन्मदिन का प्रतीक है। भारत में हर साल इस दिन को कृष्ण की शरारतों और मासूमियत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। जन्माष्टमी के बारे में जानने के लिए यहाँ क्लिक करें: जन्माष्टमी हिंदी में

और मैं एक बातचीत का महत्त्वपूर्ण हिस्सा बताना चाहूंगी जो हाल ही में हुआ है।


मेरे पति ने हमारे बेटे को उसकी अकादमी से लिया और दोनों घर की तरफ चले। रास्ते भर दोनों ने बहुत बातें की। ज़ाहिर तौर  पर, हमारे बेटे को किसी बच्चे ने अकादमी में थोड़ा परेशान कर दिया था उस दिन। बेटा उदास था, थोड़ा खिन्न भी।  उसकी कोई गलती नहीं थी तो थोड़ा नाराज़ भी था।

ह्रदय से दार्शनिक मेरे पति उसे समझाने लगे और वही बात दोहराई जो हम अक्सर अपनी बात सिद्ध करने के लिए साधारण तौर पर कह देते हैं ,

"बी ए मैन !" यानी मर्द बनो!

बेटा चुप हो गया, सोचने लगा और फिर बोला,

"आप हमेशा मर्द बनने को ही क्यों कहते हैं, पापा ? क्या औरतें मज़बूत नहीं होतीं?"

आप शायद उ…

मोबाइल फ़ोन्स को तीन गुना बेहतर कैसे इस्तेमाल करें ?

Image
मैं जब भी किसी प्रसिद्ध व्यक्ति यानी सेलिब्रिटी का इंटरव्यू पढ़ती हूँ to एक सवाल उनसे अक्सर पूछा जाता है :
वो कौन सी तीन चीज़ें हैं जिनके बिना आप घर से बाहर नहीं जाते ?
उन सभी जवाबों में मोबाइल फ़ोन का ज़िक्र ज़रूर होता है।  और हो भी क्यों न ? अगर मुझसे भी यह सवाल किया जाए तो मैं भी कहूँगी  - घर की चाबियाँ, पैसे और मोबाइल। 
क्या आप जानते हैं आज तकरीबन पांच बिलियन लोग मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल करते हैं ? ये तकनीकी दुनिया का महानतम रिकॉर्ड है। या, शायद आज हमारी पृथ्वी पर इंसानों से ज़्यादा मोबाइल फ़ोन्स हैं। 
अब तो मोबाइल फ़ोन्स के बिना ज़िन्दगी का अनुमान लगाना असंभव सा है। जापान में क़रीब 90 प्रतिशत मोबाइल फ़ोन्स वाटर-प्रूफ यानी जल-रोधक बनाये जाते हैं। वहां की युवा नहाते समय भी मोबाइल में व्यस्त रहते हैं। है न आश्चर्य की बात ?

अमनदीप मित्तल की प्रोत्साहना

Image
सबसे पहले सबसे अहम बात। नीचे दिया हुआ है मेरी नयी किताब  - The Shadow of Darkness - के  बारे में लिखा गया एक मत/राय/रिव्यु।

मेरी किताब अमनदीप मित्तल के ब्लॉग पर बुक स्पॉटलाइट में स्थान दिया गया है। 
Confessions of a Readaholic. वहां जाने के लिए नाम पर क्लिक करें। क्योंकि दो दिन बाद आपको ये नहीं मिलेगा। ये स्पॉटलाइट एक हफ्ते के लिए ही है। 
अमनदीप के शब्द बहुत ही प्रोत्साहित करने वाले हैं। शायद इसलिए भी कि उन्होंने किताब को पढ़ने के बाद अपने चुनिंदा और बेहतरीन विचारों को शेयर करने की कोशिश की। और मैं इस बात की इज़्ज़त करती हूँ और दिल से की सराहना करना चाहूंगी। 
बहुत बहुत धन्यवाद उनका ! और हाँ , अब मैं और भी ज़्यादा मेहनत कर्रूँगी। 

ये सिर्फ एक लड़की का नहीं, दोनों का साझा काम है।

Image
पिछले हफ्ते मैं अपनी सहेली से फ़ोन पर बात करने में मशग़ूल थी। मुझे याद नहीं कब हम दोनों की बातों का सिलसिला इस तरफ घूम गया मगर इतना ज़रूर याद है कि हम काम बांटने के बारे में बात कर रहे थे।  इससे पहले मैं आगे कुछ कहूँ, मेरा निवेदन है कि आप पहले ये वीडियो देखें : 


यह वीडियो बहुत सशक्त और प्रभावी वीडिओज़ में से एक है। 
तो वापस आते हैं उस फ़ोन कॉल पर। मेरी सहेली ने अपनी रोज़मर्रा की ज़िन्दगी से एक चुना हुआ पल मुझे बताया।
"हम रात का खाना (डिनर) कर चुके थे। मैं बचे हुए खाने के बर्तन रसोई में हटा  रही थी। वापस आकर जब मैं जूठी प्लेट्स को रसोई में धोने के लिए ले जाने लगी तो मेरे पति आ गए और मुझसे वो प्लेट्स लेने लगे। अमेरिका में घर के काम करने के लिए कोई नहीं मिलता। सब हमें खुद ही करना होता है। जब मेरे पति प्लेट्स लेने लगे तो मैंने मना करते हुए कहा कि कोई बात नहीं। मैं कर लूंगी। जिसके जवाब में उन्होंने ये कहा :

चलिए बात करते हैं मेरी आलोचना के विषय में

Image
जब लोग आपके द्वारा किये गए किसी काम की आलोचना करते हैं तो उसे सुनना आसान नहीं होता।  सबका अपना तरीका होता है आलोचना से जूझने का। मगर किसी भी आलोचना से निपटने का एक बहुत अच्छा रास्ता है : मुस्कुराते रहिये और जो भी सकारात्मक बात मिल सके, अपना लीजिये। 
लेखिका होने पर मुझे कई बार आलोचना का सामना करना पड़ता है। जब मेरी नयी किताब/नावेल - द शैडो ऑफ़ डार्कनेस - आयी तो स्वभावतः मुझे बेहद ख़ुशी हुई। जब भी अपनी किताबों को घर में देखती हूँ तो बहुत प्रसन्नता  है। 
कुछ समीक्षकों ने मेरी नयी बुक की समीक्षा की है। जहाँ उनमें से कुछ ने अपनी उदारता दिखाई  और किताब के मज़बूत पक्षों पर ज़्यादा ध्यान दिया, वहीँ कुछ ने नकारात्मक पक्ष पर चश्मा साध लिया। चिंता ना कीजिये ! मैं दोनों तरह की आलोचनाओं  का सम्मान करती हूँ। 

और कुछ ने तो अपनी समीक्षा में ऐसी बातें लिखी जो सच ही नहीं हैं। अच्छी और बुरी समीक्षा का स्वागत मैं करती हूँ मगर गलत आलोचना मुझे ज़रा पसंद नहीं आती। क्योंकि वो गलत नजरिया सिर्फ मैं ही नहीं वरन कई लोग पढ़ रहे हैं।  जिसकी वजह से मेरी इतनी मेहनत से लिखी गयी किताब पर गलत असर पड़ेगा। 
तो आज मैं हिम्मत की …

पेरेंट्स की शादी की वर्षगांठ पर छोटी सी कविता

कर्तव्यों की सीढ़ी चढ़ते - चढ़ते
जाने कहाँ छोड़ आये हम खुशियों की ज़मीन
मुस्कुराये हुए तो जाने एक ज़माना हो गया
और लोग कहते हैं वजह भी हैं हम हीं !

रिश्तों के भंवर में घूमते घूमते
सीधी सी ज़िन्दगी भी उलझ गयी
चले थे ज़िम्मेदारियों की बागडोर सम्हालने
पर अपने ही थोड़े बदल गए;

अब नहीं होता,  बस बहुत हो गया !
सहन नहीं होता, बहुत हो गया !
एक पल को ही सही पर कहीं छुप जाते
माँ -बाप के साये में एक बार बच्चे फिर बन जाते !
वही कोमल बूढ़ी उँगलियों को पकडे
बचपन की गलियों में दौड़ आते
थोड़ा सा गिरते, थोड़ा सम्हल आते;

लौटा नहीं सकते समय के चक्र को
तो आगे ही देखना है, मेरे साथी!
सैंतीस साल बीत गए तुम्हारे संग
तुम ही हो मेरी जीवनसाथी ;

ग़म न करो , मेरे हमसफ़र !
रिश्तों के इस भंवर में
ज़िम्मेदारियों के इस समंदर में
मैं हूँ आपका हाथ पकडे
खड़ी आपके पीछे हिम्मत बन के !

साथ जो ग़र है एक दुसरे का
मुश्किल से मुश्किल दौर भी गुज़र जाएगा;
चलो आज एक बार फिर जी लें
थोड़ा हंस लें, थोड़ा मुस्कुरा लें
कल से फिर वही ज़िन्दगी में चलना है
साथ जो हम हैं तो फिर क्या डरना है !

P.S. यह कविता मैंने अपने माँ - पापा की शादी की वर्षगांठ पर बनायी है। उन्हें बहुत पसंद आया ! कुछ ऐ…

क्या प्यार ही सब कुछ है ?

Image
रिश्ता चाहे कोई भी हो , प्रेम, स्नेह, और सान्निद्ध्य का उस पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। हमारे प्रियजन का प्यार और आशीर्वाद ही वो कड़ी है जो हमें सदैव आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। कुछ समय पहले पढ़ी गयी कुछ खूबसूरत पंक्तियाँ याद आ गयीं।  
हमने पूछा 'उम्र' और 'ज़िंदग़ी में फरक क्या है ? बहुत सुन्दर जवाब मिला- जो अपनों के बिना बीती वो 'उम्र' और जो अपनों के साथ बीती वो 'ज़िंदग़ी'। 

मगर क्या प्यार ही सब कुछ होता है रिश्तों में ? क्या प्यार ही वो मापदंड है जिसकी अधिकाधिक इकाई रिश्तों की मधुरता का द्योतक है ? यूँ तो सोचने में लगता है कि, हाँ ! प्यार ही तो सब कुछ है। प्रेम और स्नेह ही तो वो भावनाएं हैं जो इंसान को पूरा करती हैं ; जो उन्हें पास लाती हैं ; जिनसे जीवन में हर कठिनाई से जूझने का सम्बल मिलता है। अगर प्रेम नहीं तो कुछ भी नहीं ! ऐसा ही कुछ लगता है ना ? तो चलिए ! आपको सोच के सागर में थोड़ी और गहराई तक ले जाते हैं।  ऐसी गहराई जहाँ सिर्फ सोच के चमकते मोती ही नहीं वरन जीवन के कुछ छोटे - बड़े अनुभवों का भी एक छोटा सा इंद्रधनुष है।