31 January 2018

ये सिर्फ एक लड़की का नहीं, दोनों का साझा काम है।

पिछले हफ्ते मैं अपनी सहेली से फ़ोन पर बात करने में मशग़ूल थी। मुझे याद नहीं कब हम दोनों की बातों का सिलसिला इस तरफ घूम गया मगर इतना ज़रूर याद है कि हम काम बांटने के बारे में बात कर रहे थे।  इससे पहले मैं आगे कुछ कहूँ, मेरा निवेदन है कि आप पहले ये वीडियो देखें : 



यह वीडियो बहुत सशक्त और प्रभावी वीडिओज़ में से एक है। 

तो वापस आते हैं उस फ़ोन कॉल पर। मेरी सहेली ने अपनी रोज़मर्रा की ज़िन्दगी से एक चुना हुआ पल मुझे बताया।

"हम रात का खाना (डिनर) कर चुके थे। मैं बचे हुए खाने के बर्तन रसोई में हटा  रही थी। वापस आकर जब मैं जूठी प्लेट्स को रसोई में धोने के लिए ले जाने लगी तो मेरे पति आ गए और मुझसे वो प्लेट्स लेने लगे। अमेरिका में घर के काम करने के लिए कोई नहीं मिलता। सब हमें खुद ही करना होता है। जब मेरे पति प्लेट्स लेने लगे तो मैंने मना करते हुए कहा कि कोई बात नहीं। मैं कर लूंगी। जिसके जवाब में उन्होंने ये कहा :

'नहीं। कोई बात कैसे नहीं? क्या तुम ये चाहती हो कि मेरी बेटियां ये सीखें कि घर चलाना सिर्फ एक लड़की का काम है? मैं चाहता हूँ कि मैं उनके सामने ये उदाहरण पेश करूँ कि घर चलाना दोनों का काम है।'

और उन्होंने सिर्फ प्लेट्स ही नहीं पहुंचाए रसोई में बल्कि उन्हें धो कर पोंछ कर रखा भी। मुझे देख कर तसल्ली हुई कि वो अपनी बेटियों को सही शिक्षा देना चाहते हैं। वो घर के बाकी कामों में भी मेरी मदद करते हैं। "

अगर उपरोक्त वीडियो एक बेटी के नज़रिये से बनाया गया होता तो शायद इतना प्रभावी नहीं होता। लोग शायद इसे किसी और ढंग से लेते मगर चूँकि इसे एक पिता की सोच से बनाया गया है , यह दिल पर एक असर छोड़ने में कामयाब हुआ। 

अपनी बेटी को कान और कंधे के बीच फ़ोन पर बातें करते हुए पूरे घर का काम करते देख पिता को एक झटका सा लगता है।  वो पछतावे , शर्म और अपनी नाकाबिलियत कि वो अपनी बेटी को सही समय पर सही शिक्षा नहीं दे पाया , परेशान कर देता है। क्या वह एक बुरा पिता है ? नहीं।  क्या उसने अपनी बेटी को गलत शिक्षा दी या उसकी परवरिश खराब थी ? नहीं।  कोई भी परवरिश का तरीका तब तक अच्छा या बुरा नहीं कहा जा सकता जब तक कि उसे करने वाले  पैरेंट को अपने किये काम के असर के बारे में ना पता हो। इस वीडियो में दिखाए गए पिता को इस बात का एहसास ही नहीं था कि घर चलाने जैसे विषम काम का दायित्व सिर्फ लड़की का नहीं है।  यह लड़के का भी नहीं है। यह दोनों का है। ठीक उसी तरह जैसे ज़िन्दगी की बाकी उलझनें साथ मिलकर सुलझाते हैं। 

मगर सदियों से चली आ रही ऐसी अनजान परवरिश इस बात की गंभीरता को कम नहीं करती, है ना?

अगर आप एक महिला हैं जो ये पढ़ रही हैं तो अपनी भावनाओं को सम्हालें मगर अगर आप एक पुरुष हैं तो मुझे उम्मीद है कि मैं जो कहना चाहती थी, आप समझ गए होंगे। 


No comments:

Post a Comment

Let's hear your view on this, shall we?